प्रस्तावित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण को लेकर रेल विकास निगम, प्रशासन और गढ़वाल विश्वविद्यालय की टीम ने सामाजिक आंकलन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस रेल मार्ग पर बारह रेलवे स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके तहत मंगलवार को टीम ने पोखरी विकासखंड के रानौं गांव में जाकर ग्रामीणों से वार्ता की और सुझाव मांगे। इस दौरान ग्रामीणों ने रेल लाइन में अधिग्रहीत होने वाली भूमि और प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा और रोजगार की मांग की।
मंगलवार को रेल विकास निगम के डिवीजन जनरल मैनेजर (डीजीएम) पीपी बडोगा, चमोली के एडीएम डॉ. एसके बर्नवाल, एसडीएम पोखरी केएन गोस्वामी, एसडीएम कर्णप्रयाग विवेक प्रकाश और गढ़वाल विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम ने रानौं गांव में बैठक आयोजित कर ग्रामीणों से वार्ता की।
बैठक में डीजीएम बडोगा ने बताया कि प्रस्तावित 126 किमी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर बारह रेलवे स्टेशन स्थापित होेंगे। इसमें से दो रेलवे स्टेशन ऋषिकेश के मैदानी भाग में बनेंगे। जबकि पहाड़ी भागों में बनने वाले शेष दस रेलवे स्टेशनों के बारे में बताया कि पर्वतीय क्षेत्र का पहला रेलवे स्टेशन शिवपुरी में और आखिरी रेलवे स्टेशन शिवाई में बनेगा।
इस दौरान रेल लाइन निर्माण से होने वाले प्रभावों का आंकलन किया गया। ग्रामीणों ने प्रभावित परिवारों को भूमि और मकान का उचित मुआवजा व रोजगार में प्राथमिकता दिए जाने की मांग अधिकारियों से की। एसडीएम कर्णप्रयाग विवेक प्रकाश ने बताया कि रेल परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों और भूमि का स्थलीय जायजा लिया जा रहा है।