बागेश्वर। बेमौसम बारिश ने भले ही किसान, पशुपालक समेत आम इंसान की परेशानी बढ़ाई हो, लेकिन वन्यजीवन और वन संपदा के लिए इस साल का मौसम वरदान साबित हुआ है। मौसम की मेहरबानी से जंगल सुरक्षित हैं। जिले में फायर सीजन के साढ़े तीन महीनों में वनाग्नि की केवल 19 घटनाएं हुई हैं, जो पिछले साल की तुलना में 128 कम हैं। इस साल आग से होने वाला नुकसान भी नौ गुना कम रहा है।
फायर सीजन 14 फरवरी से 14 जून के मध्य रहता है। इस दौरान तापमान बढ़ने और जंगलों में पिरूल गिरने से वनाग्नि की घटनाएं चरम पर रहती हैं। इस साल भी फरवरी में वनाग्नि के इक्का-दुक्का मामले होने लगे थे, लेकिन मार्च के बाद से मौसम ने करवट बदल ली।
अप्रैल और मई में भी यही हाल है। सप्ताह में एक या दो दिन ही धूप निकल रही है, अन्य दिनों में बारिश, ओलावृष्टि हो रही है। रंग बदलते इस मौसम से वनाग्नि की घटनाएं बेहद कम हो रही हैं और हर साल लोगों के निशाने पर रहने वाले वन विभाग कर्मचारियों को भी राहत मिली है।
इस साल वनाग्नि की 19 घटनाओं में 22.90 हेक्टेयर जंगल जला है और 68,700 रुपये का नुकसान हुआ है। पिछले साल 24 मई तक वनाग्नि की 147 घटनाएं हुईं थीं जिनमें 214.67 हेक्टेयर जंगल जला था और 6,05,210 रुपये का नुकसान हुआ था। पिछले पांच वर्षों में सबसे कम वनाग्नि की घटनाएं 2020 में हुई थीं। कोरोना लॉकडाउन के चलते इस साल केवल पांच बार ही जिले के जंगल जले थे।