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Bageshwar News: जून में नामिक ग्लेशियर की ट्रैकिंग के लिए रवाना होगा दल

Mon, 22 May 2023 11:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
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लीती गांव से होगी यात्रा की शुरूआत, भ्रमण के अलावा क्षेत्र की संस्कृति, खानपान और रहन-सहन से रूबरू होंगे ट्रैकर
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। जून की शुरूआत में बागेश्वर के बिचला दानपुर के लीती गांव से पिथौरागढ़ जिले के नामिक ग्लेशियर की ट्रैकिंग के लिए दल रवाना होगा। दल ट्रैकर नामिक ग्लेशियर के बेस कैंप ट्रैकिंग करेगा। यात्रा के दौरान दल के सदस्यों को बिचला दानपुर की संस्कृति, खानपान और रहन-सहन से रूबरू होने का मौका भी मिलेगा।
नामिक ग्लेशियर को वर्ष 2018 में ट्रैक ऑफ द इयर घोषित किया गया था। बागेश्वर जिले की सीमा से लगे नामिक गांव का बिचला दानपुर से खासा जुड़ाव है। लीती, गोगिना, कीमू और नामिक के लोगों के आपस में गहरे संबंध हैं। हर साल बिचला दानपुर आने वाले सैलानी और ट्रैकर नामिक ग्लेशियर की यात्रा पर जाते हैं। क्षेत्रवासी मानते हैं कि ट्रैक ऑफ द इयर घोषित होने के बावजूद नामिक ग्लेशियर को पिंडारी और कफनी ग्लेशियर जैसी प्रसिद्धि नहीं मिल सकी है। अब धीरे-धीरे क्षेत्र के पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग लीती-नामिक ट्रैकिंग रूट का प्रचार-प्रसार कर सैलानियों और ट्रैकर को आकर्षित कर रहे हैं।
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एक से पांच जून तक होगी ट्रैकिंग
बागेश्वर। लीती से नामिक ग्लेशियर की ट्रैकिंग एक से पांच जून तक चलेगी। वंदे मातरम ग्रुप इस ट्रैकिंग को आयोजित कर रहा है। ग्रुप का उद्देश्य 20 से 25 लोगों को ले जानेे का है। अब तक 12 ट्रैकर पंजीकरण करा चुके हैं। ग्रुप के सचिव भूपेंद्र कोरंगा ने बताया कि एक जून को दल हल्द्वानी से लीती पहुंचेगा। लीती में बने होम स्टे में ट्रैकर के ठहरने का इंतजाम होगा। दूसरे दिन लीती से गोगिना तक की 15 किमी की यात्रा वाहन से होगी। ट्रैकिंग दल जिले की सीमा पर स्थित गोगिना हाईस्कूल का भ्रमण करेगा। गोगिना से करीब सात किमी की पैदल यात्रा कर दल नामिक गांव पहुंचेगा। नामिक गांव में रात बिताने के बाद तीन जून की सुबह दल नामिक ग्लेशियर के बेस कैंप के लिए रवाना होगा। साढ़े छह घंटे की ट्रैकिंग कर दल बेस कैंप पहुंचेगा। इस समय नामिक ग्लेशियर के बेस कैंप में एक से दो फुट बर्फ जमा रहती है। बेस कैंप में रात बिताने के बाद अगले दिन चार जून को दल वापस लौट आएगा। उसी रात लीती में यात्रियों के लिए विशेष उत्सव का आयोजन किया जाएगा। उन्हें स्थानीय लोकनृत्य, व्यंजन, रिंगाल से बने उत्पाद और खाद्य पदार्थों को जानने का मौका मिलेगा।


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