बागेश्वर। पूर्व में भागीरथी नदी के नाम से जानी जाने वाली नदी अब नाले का रूप ले चुकी है। नाले में पटी गंदगी तमाम स्वच्छता अभियानों की हकीकत सामने लाने का काम कर रही है। नाले की स्वच्छता की ओर नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
भागीरथी नदी के चलते इलाके का नाम ही भागीरथी पड़ गया था। समुचित देखरेख के अभाव में यह नदी अब गंदे नाले के रूप में परिवर्तित हो गई है। मीट मार्केट से जिला अस्पताल के पास तक इस नाले में बुरी तरह से गंदगी पटी हुई है। मीट मार्केट की गंदगी भी इस नाले में समाती है। लोगों ने कई बार भागीरथी नदी के पुनरोत्थान के लिए अभियान चलाए, नाले में पटी गंदगी को साफ किया, लेकिन देखरेख के अभाव में नाला फिर गंदगी से पट जाता है।
वर्तमान में लोग नाले का कूड़ा निस्तारण स्थल के रूप में उपयोग कर रहे हैं। जिले में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा कहते हैं कि भागीरथी अतीत में नदी के रूप में बहती थी। देखरेख के अभाव में नाले में तब्दील हो गई। इसके संरक्षण के लिए ठोस उपाय होने चाहिए।
कोट
नगरपालिका के ईओ हयात सिंह परिहार ने बताया भागीरथी नाले की सफाई के लिए 20 जनवरी के बाद सघन अभियान चलाया जाएगा। नाले को गंदगी रहित बनाया जाएगा। नाले में गंदगी, कूड़ा डालने वाले लोगों को चिह्नित कर दंडित करने का काम किया जाएगा।