धाम के कारण नाम पड़ा बैजनाथ
कत्यूरी राज में बैजनाथ में बैजनाथ धाम की स्थापना हुई। इसी धाम के कारण उस इलाके को बैजनाथ नाम से पुकारा जाता है। भगवान बैजनाथ का मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।
सैकड़ों ऐतिहासिक मूर्तियां ताले में बंद
पुरा तात्विक महत्व का बैजनाथ मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन है। मंदिर की देखरेख विभाग करता है, लेकिन देखरेख में कमी कहें या संजीदगी की कमी। धाम तमाम असुविधाएं झेल रहा है। बैजनाथ में कत्यूरी काल की सैकड़ों ऐतिहासिक मूर्तियां हैं। इन मूर्तियों को मंदिर परिसर की प्राचीन इमारत में रखा गया है और बाहर से ताला लगा है। इन प्राचीन मूर्तियों के दीदार कोई नहीं कर सकता। लंबे समय से बैजनाथ मंदिर परिसर में संग्रहालय बनाने की मांग उठ रही है, ताकि ऐतिहासिक मूर्तियों को संग्रहालय में सहेजा जा सके। संवाद
नहीं हुआ बैजनाथ हेलीपैड का विस्तार
बागेश्वर जिले के धार्मिक, साहसिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए बीते चार सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैजनाथ के हेलीपैड का विस्तार कर हवाई सेवा शुरू करने का ऐलान किया था। अब तक घोषणा परवान नहीं चढ़ी है।
ऐतिहासिक, पौराणिक महत्व के बैजनाथ की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की दिशा में कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सबसे पहले धाम में संग्रहालय का निर्माण होना चाहिए। - त्रिलोक गिरी पुजारी बैजनाथ धाम
बैजनाथ धाम में संग्रहालय बनाने का मामला भारत सरकार के सामने रखा गया है। इसके लिए गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे। बैजनाथ के साथ ही जिले के अन्य धाम जल्द पर्यटन सर्किट से जुड़ेंगे। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। सीएम की घोषणा के अनुरूप बैजनाथ हेलीपैड का विस्तार होगा। इसका सर्वे हो गया है। - चंदन राम दास समाज कल्याण मंत्री