बागेश्वर। वाछम बिजली परियोजना से सरकारी कामकाज का अंदाजा लगाया जा सकता है। 17 साल पहले स्वीकृत बिजली परियोजना का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। इस अवधि में यह गांव बिजली से आच्छादित हो गया। देर सबेर परियोजना का काम पूरा होगा तो पूरी बिजली ग्रिड को जाएगी।
कपकोट विकासखंड के वाछम गांव को बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने वर्ष 2006 में 500 किलोवाट की बिजली परियोजना मंजूर की थी। परियोजना के निर्माण का जिम्मा अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) को सौंपा गया। करीब साढ़े चार करोड़ लागत की परियोजना का काम चल रहा था कि वर्ष 2013 के जलप्रलय से परियोजना के जल स्रोत को भारी नुकसान पहुंचा। निर्माणाधीन परियोजना को करीब 56-60 प्रतिशत क्षति पहुंची थी। निर्माणाधीन परियोजना के स्रोत पर आधा ही पानी रह गया। परियोजना को 500 केवी के स्थान पर 250 केवी का कर दिया गया।
वर्ष 2014 में एक बार फिर नए सिरे से परियोजना के टेंडर किए गए। गांव के लोग परियोजना का काम पूरा होने की आस लगाए बैठे, लेकिन यह आस हकीकत में नहीं बदल सकी। हालात ऐसे हैं कि परियोजना का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। इस अवधि में वाछम गांव यूपीसीएल की बिजली से रोशन हो गया। अब परियोजना का काम पूरा होने पर बिजली ग्रिड को देने की बात कही जा रही है।
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तमाम काम अधूरे
बागेश्वर। उरेडा के हाइड्रो डिवीजन के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार परियोजना में सिविल कार्य करीब 95 प्रतिशत पूरा हो गया है। मशीनें स्थापित करने का काम करीब 35 प्रतिशत हुुआ है। टरबाइन और जेनरेटर लग गया है। कंट्रोल पैनल नहीं बना है। कब परियोजना का काम पूरा होता है, कब बिजली का उत्पादन होता है, कब परियोजना सरकार को राजस्व देना शुरू करती है, यह देखने वाली बात होगी। संवाद
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ठेकेदार को काली सूची में डालने की तैयारी
बागेश्वर। उरेडा के अधिकारियों के अनुसार वाछम की बिजली परियोजना का काम कर रहे ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया है। उरेडा के हाइड्रो डिवीजन हल्द्वानी के स्तर से ठेकेदार को काली सूची में डालने की कार्रवाई की जा रही है। संवाद
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पुराने ठेकेदार को काली सूची में डालने के संबंध में डिवीजन स्तर पर कार्यवाही चल रही है। उसके बाद नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे। वाछम परियोजना का काम पूरा किया जाएगा।
एसएस रावत परियोजना अधिकारी हाइ्ड्रो शाखा उरेडा पिथौरागढ़।