बागेश्वर के ठाकुरद्वारा में मरी मधुमक्खियां। संवाद
बागेश्वर। उद्यान विभाग की नर्सरी में आम के बौर में छिड़के गए कीटनाशक से ठाकुरद्वारा के मौनपालक को भारी नुकसान हुआ है। जहरीले केमिकल से उनकी सभी श्रमिक मधुमक्खियां मर गई हैं और इस सीजन में शहद बनने की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। मधुमक्खियों के मारे जाने से मौन पालक को डेढ़ लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। विभाग ने इस मामले में अपनी गलती मानने से इनकार किया है।
नगर के ठाकुरद्वारा वार्ड में आबादी के बीच उद्यान विभाग की नर्सरी है। नर्सरी के समीप ही मौनपालक नीरज पांडेय का घर है। उनके पास मौन के दस बक्से हैं। मधुमक्खियां नर्सरी और आसपास के क्षेत्र से फूलों का रस लाकर शहद निर्माण करती है। हर साल नीरज डेढ़ से दो लाख रुपये का शहद बेचते हैं। बीते शुक्रवार को नर्सरी से मधुमक्खियों का झुंड वापस लौटा तो एक-एक कर मौन मरने लगे। मधुमक्खियों के मरने का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। नीरज ने मधुमक्खियों के मरने का कारण जाना तो पता चला कि उद्यान विभाग ने आम के बौर को बीमारी से बचाने के लिए नर्सरी में कीटनाशक का छिड़काव किया था। फूलों के रस के साथ जहरीले कीटनाशक का रस शरीर में जाने से मधुमक्खियों की मौत होने लगी।
नीरज ने बताया कि मधुमक्खी के बॉक्स में एक रानी मक्खी के साथ नर, स्वच्छक और श्रमिक मौन रहते हैं। बक्से में सबसे अधिक तादाद श्रमिकों की होती है और यही शहद निर्माण के लिए फूलों का रस या मकरंद लेकर आते हैं। बताया कि इस सीजन में शहद निर्माण की प्रक्रिया शुरु होती है। वह हर साल 160 किलो से अधिक शहद बेचते थे, लेकिन इस साल मधुमक्खियों की मौत से शहद नहीं बन सकेगा। जब तक बॉक्स में नए श्रमिक मधुमक्खी पैदा नहीं होंगी, शहद भी नहीं बन पाएगा। नए श्रमिक मक्खियों केे तैयार होने में डेढ़ साल या अधिक समय लग सकता है।
विभाग की नर्सरी में आम के बौर को बीमारी से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव किया गया था। आसपास कोई मौनपालक रहता है, इसकी जानकारी हमें नहीं थी। अगर कीटनाशक नहीं छिड़कते तो आम की फसल को नुकसान होना तय था। जहां तक मौनपालक को हुए नुकसान का मुआवजा देने की बात है तो उसका कोई प्रावधान नहीं है। - आरके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, बागेश्वर।