बेसिक शिक्षा मेंं 17,620, माध्यमिक शिक्षा अशासकीय विद्यालयों में 12,896 विद्यार्थियों के लिए भेजी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। सरकारी शिक्षा की व्यवस्थाओं पर समय-समय पर सवाल उठने के बावजूद कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार होता नहीं दिखता है। ताजा मामला विद्यालयों में मिलने वाली पाठ्य पुस्तकों का है। नए शिक्षा सत्र को शुरू हुए 19 दिन का समय बीत गया है लेकिन अब किताबें नहीं पहुंची है। पुस्तकें नहीं मिलने से पठन-पाठन में परेशानी हो रही है।
जिले में 561 प्राथमिक विद्यालय, 111 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 32 हाईस्कूल और 61 इंटर कॉलेज सरकारी हैं। 14 विद्यालय अशासकीय हैं। बेसिक शिक्षा (कक्षा एक से आठ तक) मेंं 17,620 विद्यार्थी हैं जिनके लिए विभाग की ओर से 1,19,396 पुस्तकों की मांग भेजी गई है। माध्यमिक शिक्षा (कक्षा नौ से बारह) और अशासकीय विद्यालयों की छात्र संख्या 12,896 है। माध्यमिक और अशासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए 1,28,667 पुस्तकें मंगाई गई हैं। अब तक सीईओ कार्यालय में ही पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं।
निशुल्क मिलने वाली पुस्तकों के समय पर नहीं मिलने का मामला नया नहीं है। बीते वर्षों में भी पुस्तकें देरी से आती रही हैं। देरी के बावजूद सभी पुस्तकें एक साथ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाती हैं। अप्रैल में शिक्षा सत्र की शुरुआत हो जाती है लेकिन जून तक पुस्तकों के आने का सिलसिला जारी रहता है।
इस वर्ष अशासकीय विद्यालयों में पहली बार निशुल्क पुस्तक वितरण किया जाएगा। जिले से पुस्तकों के लिए मांग भेजी गई है। पुस्तकों की छपाई का काम अंतिम चरण में चल रहा है। अप्रैल के अंत तक पुस्तकों के पहुंचने की पूरी उम्मीद है।
जीएस सौन, सीईओ, बागेश्वर