बागेश्वर। बागेश्वर को जिला गठन के 25 साल बीतने के बाद भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की सुविधा नहीं मिल पाई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सात महीने पहले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराने की घोषणा की थी। सीएम घोषणा के अनुरूप सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की डीपीआर तैयार की जा रही है। एक महीने के भीतर डीपीआर तैयार होने की संभावना है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट न होने के कारण नदियों के शहर बागेश्वर में भूजल प्रभावित होने के साथ ही नदियों का जल प्रदूषित हो रहा है। सीवर की गंदगी नदियों में समा रही है। प्रत्येक चुनाव में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट राजनीतिक दलों की जुबान पर होता है, लेकिन चुनाव बीतने के बाद यह मुद्दा नेता भूल जाते हैं या भुला दिया जाता है। लगातार उठ रही मांग के बाद वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करने की घोषणा की थी। तब योजना की डीपीआर शासन को भेजी गई, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। बीते साल चार सितंबर को वर्तमान मुख्यमंत्री ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराने की घोषणा की।
पेयजल निगम के ईई वीके रवि ने बताया कि नगर क्षेत्र में 127 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाई जानी है। डीपीआर बनाने का काम तेजी से चल रहा है। एक महीने में डीपीआर तैयार होने की संभावना है।
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लागत में हो रही भारी बढ़ोतरी
बागेश्वर। पेयजल निगम से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में शासन को भेजी गई डीपीआर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की लागत करीब 49 करोड़ रुपये थी। अब प्लांट की लागत करीब 65 करोड़ आने की संभावना है। इतनी भारी भरकम रकम को स्वीकृति दिलाना शासक वर्ग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उधर, प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री स्थानीय विधायक चंदन राम दास का कहना है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा। जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार से बजट की मांग की जाएगी। संवाद