बागेश्वर। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। जिले के अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। 200 प्राथमिक विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। कुछ विद्यालयों में 10 वर्षों से एक ही शिक्षक सेवा दे रहे हैं। नई नियुक्तियां न होने से इन विद्यालयों को शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं।
जिले में 561 प्राथमिक विद्यालय हैं। अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में पूरा स्टाफ मौजूद नहीं है। शिक्षकों की कमी के कारण छात्र-छात्राओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं, कुछ विद्यालयों में छात्र संख्या के सापेक्ष भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की बेसिक शिक्षा पर पड़ रहा है।
एकल शिक्षक को विद्यालय में शिक्षण कार्य के अलावा प्रधानाध्यापक के कार्य, मध्याह्न भोजन की जिम्मेदारी, कार्यालयी कार्य भी संभालना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। प्राथमिक स्तर पर शिक्षा बेहतर नहीं होने का खामियाजा बच्चों को उच्च प्राथमिक कक्षाओं में उठाना पड़ता है। जिले के तीनों ब्लॉकों में कई प्राथमिक स्कूलों के एकल शिक्षक होने से अभिभावकों में भी नाराजगी पनप रही है। वहीं, शिक्षकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 148 प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। नई नियुक्ति होने के बाद एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाएंगे। - गजेंद्र सिंह सौन, सीईओ बागेश्वर।