बागेश्वर। मनुष्य प्रतिभावान हो और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा भरा होने पर कोई भी कमी आड़े नहीं आती। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है रीमा गांव के लोकगायक पूरन सिंह राठौर ने। दोनों आंखों से दिव्यांग पूरन अपनी कला के माध्यम से न सिर्फ पारंपरिक कला को संरक्षित कर रहे हैं बल्कि इसी कला के दम पर उन्होंने प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार जीतकर श्रेष्ठ कलाकारों की सूची में भी अपना नाम दर्ज करा लिया है। अपनी इस उपलब्धि से उन्होंने जिले और प्रदेश का नाम भी रोशन किया है।
नई दिल्ली में रविंद्र भवन के मेघदूत रंगमंच परिसर में बीते 15 फरवरी को आयोजित समारोह में वर्ष 2019, 2020 और 2021 के पुरस्कार दिए गए। देशभर के 102 कलाकारों का चयन पुरस्कार के लिए हुआ था। पूरन सिंह को उत्तराखंड फोक संगीत और गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए पुरस्कृत किया गया। संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने पुरस्कार वितरण किया और कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने की। पूरन को पुरस्कार के रूप में 25 हजार की राशि और प्रतीक चिह्न दिया गया।
कठिनाइयों के बावजूद नहीं मानी हार
बागेश्वर। 39 वर्षीय पूरन सिंह बताते हैं कि जब वह छह महीने के थे तो उनकी दोनों आखों की रोशनी चली गई। बचपन से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। वह पढ़ाई नहीं कर सके। इस दौरान उनका ध्यान पारंपरिक गीतों की ओर गया। धीरे-धीरे वह लोक संगीत के प्रति गंभीर हो गए। उनकी सुरीली आवाज सुनकर लोगों ने भी प्रोत्साहित करना शुरू किया। 11 वर्ष की उम्र से उन्होंने कार्यक्रमों में जाकर गाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे उन्होंने पारंपरिक गीत-संगीत को ही अपनी आय का जरिया बना लिया और मेले, संगीत कार्यक्रमों में शिरकत करने लगे। वह बागेश्वर की उत्तरायणी मेले के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों और देहरादून में आयोजित कार्यक्रमों में अपनी लोक कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। पूरन कहते हैं कि वह दिव्यांग तो हैं लेकिन भगवान ने उपहार में उन्हें कला प्रदान कर दी।
हर कदम पर पत्नी का साथ, कलाकारों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ
बागेश्वर। पूरन सिंह की पत्नी हेमा देवी हर कदम पर अपने पति का साथ देती हैं। वह चार बच्चों की देखभाल करने के साथ-साथ कई कार्यक्रमों में पति का सहारा बनकर जाती हैं। दिल्ली में आयोजित समारोह में भी वह अपने पति के साथ रहीं। पूरन बताते हैं कि जागर सम्राट के रूप में प्रसिद्ध लोक गायिका बसंती बिष्ट दीदी और संगीत निर्देशक रणजीत सिंह ने उन्हें काफी सहयोग दिया है। रणजीत सिंह ही उनके वीडियो अपने स्टूडियो में निशुल्क बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर उन्हें पहचान दिला रहे हैं।
इन्हें मिलता है पुरस्कार
बागेश्वर। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार की शुरुआत प्रदर्शन कला के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट युवा प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करने और कलाकारों को जीवन की शुरुआत में ही राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से की गई है। वर्ष 2006 में इस पुरस्कार की शुरुआत की गई थी।