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श्रावणी उपाकर्म पर विधि विधान से धारण किया नया जनेऊ

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बागेश्वर के कपकोट में श्रावणी उपाकर्म करते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। श्रावण की पूर्णिमा को जिले में उपाकर्म का पर्व धूमधाम से मनाया गया। सभी पवित्र घाटों पर स्नान के बाद लोगों ने अनुष्ठान किया और विधि विधान से जनेऊ को शुद्धिकरण करने के बाद धारण किया। जिला मुख्यालय, कपकोट, काफलीगैर, कांडा आदि क्षेत्रों में पुरोहितों ने यज्ञोपवीत की प्रतिष्ठा कर उपाकर्म संस्कार किए। जिले के सभी गांवों में उपाकर्म का पर्व विशेष उल्लास के साथ मनाया गया। लोगों ने पवित्र घाटों में स्नान करने के बाद नए जनेऊ धारण किए। कपकोट ब्लॉक के पुंगर घाटी स्थित ग्रामसभा दोफाड़ में श्रावण उपाकर्म की परंपरा हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। गांव के युवा, बुजुर्ग जनेऊ धारण कर पुंगर नदी तट पर हुए अनुष्ठान में पहुंचे। आज के दिन ग्रामीण कलश पूजन, जनेऊ शुद्धिकरण, तर्पण आदि करते हैं। इसे जन्यो पुन्यो के नाम से भी जाना जाता है। पंडित जगदीश उपाध्याय ने बताया कि श्रावण शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को श्रावणी या रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। जिसे उपाकर्म कहते हैं। उपाकर्म में ऋषि प्रदत्त ज्ञान की प्राप्ति के लिए कुश से सप्तऋषियों की स्थापना कर पूजा की जाती है। इसके बाद तर्पण करके यज्ञोपवीत धारण की जाती है। यज्ञोपवीत धारण करने के दौरान मंत्र का जाप किया जाता है। इस दिन यज्ञोपवीत के साथ पौराणिक रक्षाबंधन का भी विशेष महत्व है। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान भूपाल सिंह, उमेद सिंह, प्रकाश सिंह, दीवान सिंह, विनोद सिंह, विक्रम सिंह, जगदीश सिंह, नवीन चंद्र पांडे आदि थे।
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