शामा में रिंगाल के उत्पादों के साथ महिलाएं। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। जन शिक्षण संस्थान बागेश्वर ने दूरस्थ क्षेत्र शामा में महिलाओं को रिगाल और बांस से विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाना सिखाया। प्रशिक्षण के दौरान संस्थान की प्रशिक्षक विमला देवी ने रिंगाल और बांस से टोकरी, पैन स्टेंड, फ्लावर पॉट, बुक सेल्फ, लाइट स्टेंड के साथ ही सजावटी सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया। उत्पादों को बेचने के लिए बाजार की जानकारी भी महिलाओं को दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. जितेंद्र तिवारी ने कहा कि आज के समय में रिंगाल से बनी वस्तुएं देसी, विदेशी सैलानियों की पसंद बन रही हैं। इन उत्पादों का प्रशिक्षण लेकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए रिंगाल और बांस लाभकारी साबित हो सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकला देवी ने संस्थान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण इलाके के लोगों को रोजगार प्राप्त करने में मदद मिलेगी। संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र सिंह खेतवाल ने उत्तराखंड के हस्तशिल्पी पुरातन काल से रिंगाल और बांस का उपयोग करते रहे हैं। पहले लोग रिंगाल से डोका, सूप, मोस्टा, डलिया आदि बनाते थे। अब यह सामान कम बिकता है। इसी को देखते हुए संस्थान रिंगाल से सजावटी सामान बनाने का प्रशिक्षण दे रहा है।