गरुड़ (बागेश्वर)। तेंदुए के हमले से दो छात्राओं की जान बचाने वाले राजकीय इंटर कॉलेज अमस्यारी के 11 वीं के छात्र भाष्कर परिहार की वीरता फाइलों में अटक गई। अब सबके अपने-अपने तर्क हैं। एक सार्थक प्रयास के अभाव में छात्र की बहादुरी को वह सम्मान नहीं मिल सका है जिसका वह हकदार था।
कॉलेज के प्रधानाचार्य हरेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि 11वीं के छात्र भाष्कर की वीरता पुरस्कार की फाइल मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को भेजी थी। बाल विकास विभाग देहरादून से आवेदन में कुछ आपत्तियां लगा दी गईं। उन्होंने इसका निस्तारण कर आवेदन मुख्य शिक्षा अधिकारी को फिर से आवदेन भेजा था। इधर उत्तराखंड शासन में बाल विकास परिषद की महासचिव पुष्पा मानस ने कहा कि भाष्कर की फाइल शासन में नहीं पहुंची है। पीएमजीएसवाई अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट ने बताया कि वह इस मामले में शुक्रवार को सीएम पुष्कर सिंह धामी से आज वार्ता करेंगे।
ऐसे बचाई थी जान
गरुड़ के भिलकोट गांव निवासी भाष्कर परिहार 24 अगस्त 2023 को अपने साथियों के साथ पैदल स्कूल जा रहा था। इस बीच झाड़ी में घात लगाकर बैठे तेंदुए ने छात्रा नीतू पर हमला कर दिया। नीतू की चिल्लाने पर भाष्कर ने तेंदुए पर पत्थरों से वार किया। इस पर तेंदुआ भाग गया था। नीतू को खून से लतपथ देख उसकी सहेली दीक्षा भी बेहोश हो गई थी।
उम्मीद: जरूर भेजा जाएगा नाम
भाष्कर परिहार ने उम्मीद जताई है कि 26 जनवरी को मिलने वाले वीरता पुरस्कार के लिए उत्तराखंड सरकार नाम केंद्र सरकार को भेजेगी।
सिस्टम पर उठाए सवाल
जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा क यदि समय पर फाइल शासन को भेजी गई होती तो वीरता पुरस्कार जरूर मिलता। कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने इसे बड़ी लापरवाही बताया है।