बागेश्वर। ग्रामीण अंचलों में पैदा होने और बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों को विपणन की समस्या का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (reap) उत्पादकों की इस परेशानी को दूर करने का काम कर रही है। परियोजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़े उद्यमियों के उत्पादों को आउटलेट के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जिले के अलग-अलग स्थानों में सप्ताह भर आउटलेट लगाए जा रहे हैं।
रीप परियोजना अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि से पोषित है। योजना का उद्देश्य पूर्व में आजीविका मिशन के तहत गठित प्रदेश के 60,000 समूहों और 601 आजीविका संघ/कलस्टर स्तरीय फेडरेशन के माध्यम से 5,60,000 ग्रामीण परिवारों की ग्रामीण उद्यम आधारित आजीविका में बढ़ोतरी करना है। जिले में 73 स्वयं सहायता समूह, 11 ग्राम संगठन और आठ ग्राम पंचायतों के 556 परिवार योजना में शामिल हैं। परियोजना के माध्यम से ऊर्जा सीएलएफ के तहत आउटलेट लगाकर मौसमी सब्जी, सभी प्रकार के अचार, हस्त शिल्प के उत्पाद, कीवी के बने जूस, जैम, जैली, चटनी व अन्य उत्पाद, मडुवा, झिंगोरा समेत सभी श्री अन्न की बिक्री की जा रही है।
कब, कहां मिलेंगे स्थानीय उत्पाद
बागेश्वर। डीएम कार्यालय और बैजनाथ में सोमवार को, एसपी कार्यालय में बुधवार को, गरुड़ के आपुण बाजार में बृहस्पतिवार को और विकास भवन में शुक्रवार को आउटलेट लगाया जाएगा। विकास भवन में रोजाना भी आउटलेट लगा रहेगा लेकिन ताजी सब्जियां शुक्रवार को ही आएंगी। स्थानीय स्तर पर होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी आउटलेट लगाए जाएंगे।
रीप परियोजना के उद्देश्यों को पूरा करते हुए स्थानीय उत्पादों को कई स्थानों पर आउटलेट लगाकर लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों की लोगों में अच्छी मांग है। भविष्य में मांग बढ़ी तो आउटलेट भी बढ़ाए जाएंगे। -मोहम्मद आरिफ खान, जिला परियोजना अधिकारी, रीप।