बागेश्वर। जिले की पिंडर घाटी से गढ़वाल मंडल के चमोली की ओर बहने वाली शंभू नदी में फिर झील बनने की सूचना है। पिछले साल भी जून के अंतिम सप्ताह में नदी में मलबा गिरने के कारण करीब 700 मीटर लंबी और 50 मीटर चौड़ी झील बन गई थी। झील बनने की जानकारी मिलते ही सरकारी अमला अलर्ट हो गया है। सिंचाई विभाग के जेई मुआयना करने के लिए कुंवारी गांव गए हैं।
शंभू नदी जिले के सीमांत और आपदा प्रभावित गांव कुंवारी की तलहटी से बहती है। वर्ष 2013 में आई आपदा के दौरान कुंवारी गांव की पहाड़ी दरकने से मलबा नदी में गिरने लगा। धीरे-धीरे मलबा गिरने से नदी में झील आकार लेने लगी थी। वर्ष 2018 में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरा और नदी में झील ने आकार ले लिया। पिछले साल जून में बड़ी झील के बनने का पता चला था। जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद झील का मुहाना खोलकर खतरा होने से बचाया। अब एक बार फिर से झील बनने की सूचना है। झील बनने की जानकारी मिलते ही सिंचाई विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए जेई तरुण लुम्याल को झील का निरीक्षण करने के लिए भेज दिया है। शंभू नदी पर बार-बार आकार ले रही झील से चमोली जिले के नदी किनारे बसे गांवों के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है।
शंभू नदी पर कुंवारी गांव की पहाड़ी से मलबा गिरने से झील के आकार लेने की सूचना मिली थी। फिलहाल किसी तरह का खतरा नहीं है। टीम को निरीक्षण के लिए भेज दिया है। टीम के आने के बाद ही वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
पीएस बिष्ट, ईई सिंचाई विभाग कपकोट