बागेश्वर। अंग्रेजी शासनकाल में बने नगर के ऐतिहासिक झूला पुल के रखरखाव के लिए लोनिवि तैयार नहीं है। झूलापुल की देखरेख करने वाली नगर पालिका रखरखाव में सक्षम नहीं है। इसी कारण यह ऐतिहासिक झूला पुल लगातार क्षतिग्रस्त हो रहा है। पुल की स्थिति को देखते हुए डीएम को पुल पर आवाजाही रोकनी पड़ी है।
अंग्रेज शासकों ने वर्ष 1913 में सरयू नदी पर आवाजाही के लिए झूलापुल बनाया था। नगर की धरोहरों में शामिल यह झूलापुल बेहतरीन वास्तुकला के लिए जाना जाता है। जब यहां पक्की सड़क नहीं थी, तब यही झूलापुल आवागमन का प्रमुख माध्यम था। अब भी यह पुल नगर के कत्यूर बाजार और दुग बाजार को जोड़ने का सुगम साधन है।
प्रशासन के अनुसार लोनिवि पुल को अपने अधीन लेने के लिए तैयार नहीं है। पुल की देखरेख जिम्मेदारी संभालने वाली नगरपालिका पुल के रखरखाव में सक्षम नहीं है। डीएम आराधना पाल ऐतिहासिक पुल के संरक्षण की जिम्मेदारी तय करना चाहतीं हैं। इस पर बागेश्वर के लोगों की नजर है। जिले के लोग इस झूलापुल को सुरक्षित देखना चाहते हैं।
डीएम के आदेश के परिपालन में लग गए 18 घंटे
बागेश्वर। पुल पर मंडराए खतरे को देखते हुए डीएम ने बुधवार को पुल पर आवाजाही बंद करने के लिखित आदेश जारी किए थे। आदेश के परिपालन में नगरपालिका को करीब 19 घंटे लग गए। बुधवार शाम करीब 6:30 बजे सूचना विभाग ने मीडिया ग्रुप में डीएम का आदेश जारी किया था। डीएम के आदेश का पालन बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे तक भी नहीं हुआ था। दोपहर 12 बजे बाद नगरपालिका की टीम ने पुल को दोनों ओर से लोहे के टिन से बंद कर आवाजाही रोकी। संवाद
झूलापुल की देखरेख के लिए लोनिवि तैयार नहीं है। सीमित संसाधनों के कारण नगर पालिका सक्षम नहीं है। पुल की मरम्मत और पुल का अस्तित्व बनाए रखने के लिए जल्द ही ठोस फैसला लिया जाएगा। योजना तैयार की जाएगी। -अनुराधा पाल, डीएम, बागेश्वर।