बागेश्वर। टनकपुर-बागेश्वर ब्रॉड गेज रेल लाइन का सर्वे निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पाया है। सर्वे के लिए अब नई तारीख मिली है। आरटीआई से मांगी गई जानकारी में सर्वे पर अब तक खर्च हुई रकम की जानकारी तो दी गई है, लेकिन कितना सर्वे हुआ है, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
टनकपुर से बागेश्वर तक 154.58 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण प्रस्तावित है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान हल्द्वानी में हुई सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बागेश्वर रेल लाइन के निर्माण की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद रेलवे बोर्ड ने ब्राडगेज रेल लाइन की सर्वे के लिए 28 करोड़ रुपये जारी किए थे। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का सर्वे 26 नवंबर 2022 तक होना था। अब तक रेल लाइन सर्वे का काम पूरा नहीं हुआ है। आरटीआई से मिली जानकारी में पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय गोरखपुर ने इस साल के अंत तक रेल लाइन का सर्वे पूरा होने की बात कही है।
बागेश्वर के भिटालगांव निवासी पवन पांडेय ने बीते 21 मार्च को आईटीआई से रेल लाइन की सर्वे और सर्वे पर अब तक खर्च हुई रकम की जानकारी मांगी थी। आरटीआई के जवाब में पूर्वोत्तर रेलवे ने जानकारी दी है कि अब तक सर्वे पर 5.94 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जानकारी दी है कि सर्वे का काम तेजी से चल रहा है। इस साल के अंत तक ब्राडगेज रेल लाइन के सर्वे का काम पूरा हो जाएगा। 154. 58 किमी लंबी प्रस्तावित रेल लाइन का सर्वे कितना हुआ है। इसकी जानकारी देने से पूर्वोत्तर रेलवे ने गुरेज किया है।
आरटीआई कार्यकर्ता पांडेय वे कहा है कि पूर्वोत्तर रेलवे से सारे बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन आधी-अधूरी जानकारी दी गई है। कितना सर्वे हुआ है, यह तक नहीं बताया गया है। कहा कि वह अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील करेंगे। सर्वे में उलझी रेल लाइन का सर्वे का काम कब पूरा होगा? कब निर्माण होगा? इस पर लोगों की नजर लगी हुई है। संवाद
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अंग्रेजों ने दिखाया था रेल लाइन का सपना
बागेश्वर। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का सपना अंग्रेजों ने दिखाया था। इसके लिए अंग्रेजी सासनकाल में वर्ष 1911-12 में सबसे पहले सर्वे हुआ था। आजाद भारत में सामरिक महत्व की इस रेल लाइन का सर्वे छह बार हो चुका है। वर्ष 2013 में केंद्र सरकार ने टनकपुर-बागेश्वर प्रस्तावित रेल लाइन को राष्ट्रीय महत्व की योजना घोषित किया था, लेकिन रेल लाइन के निर्माण का मार्ग उसके बाद भी प्रशस्त नहीं हुआ। संवाद
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चार जिलों के लिए लाभकारी होगी रेल
बागेश्वर। टनकपुर-बागेश्वर के बीच रेल चलती है तो इसका लाभ न केवल बागेश्वर बल्कि कुमाऊं के चारों पहाड़ी जिलों बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत के लोगों को होगा। चारों जिलों के सरयू घाटी से सटे इलाके रेल मार्ग से जुड़ेंगे। सरयू घाटी से सटे इलाकों में फल, सब्जियों का प्रचुर उत्पादन होता है। लोगों के उत्पादों को बाजार मिलेगा। यातायात सुगम हो जाएगा। चीन और नेपाल से सटे इलाके के लिए सामरिक महत्व से भी यह रेल लाइन मुफीद होगी। इसका लाभ भारतीय सेना को भी मिलेगा। संवाद
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बात सर्वे से आगे न बढ़ना कष्टकारी है। सर्वे भी समय पर पूरी नहीं हो रहा है। सामरिक महत्व की रेल लाइन के लिए तत्काल बजट अवमुक्त कराया जाना चाहिए। अब और इंतजार नहीं किया जा सकता।
नीमा दफौटी अध्यक्ष टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति