बागेश्वर। जिले का जल संस्थान जूनियर इंजीनियरों (जेई)की कमी से जूझ रहा है। जिले की 150 पेयजल योजनाएं मात्र तीन जेई के भरोसे हैं। विभाग में आठ पद स्वीकृत हैं। पांच जूनियर इंजीनियरों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं।
जिले के तीनों ब्लॉकों में जल संस्थान के पास 150 पेयजल योजनाओं की जिम्मेदारी हैं। जिनमें नगरपालिका, नगर पंचायत क्षेत्र के अलावा छह तहसील और एक उप तहसील के क्षेत्र शामिल हैं। सामान्य तौर पर नगरीय क्षेत्र के लिए अलग से जेई होते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं की जिम्मेदारी अलग जेई पर होती है।
जिले में जेई की कमी के कारण एक जेई को बागेश्वर नगर, ग्रामीण और खरही मंडल की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। एक जेई गरुड़ और एक कांडा-दुगनाकुरी का क्षेत्र देख रहे हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले कपकोट के नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में एक भी जेई नहीं हैं। विभाग की ओर से उपनल के माध्यम से एक जेई को नियुक्त किया गया है लेकिन स्थायी जेई नहीं होने के कारण अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
प्रभावित हो रहे कई काम
बागेश्वर। जल संस्थान में जेई के पास पंपिंग और ग्रेविटी योजनाओं की देखरेख के अलावा जल जीवन मिशन के कार्य की भी जिम्मेदारी रहती है। उपभोक्ताओं की ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायतें सुनना, सीएम पोर्टल की शिकायतों का संज्ञान लेना, बिलों की वसूली आदि कार्य भी जेई को करने होते हैं। समय पर वसूली नहीं होने से विभाग में कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों के निकलने में भी परेशानी खड़ी हो जाती है। लाइन क्षतिग्रस्त होते ही उसकी मरम्मत कराने का कार्य भी जेई संभालते हैं लेकिन जिले में जेई के अधिकांश पद खाली होने से इन कार्यों पर असर पड़ रहा है।
जल संस्थान में जेई के पांच पद रिक्त होने से दिक्कत हो रही है। हालांकि सहायक अभियंता (एई)और कार्यालयी स्टाफ को जिम्मेदारी बांटकर कार्य संपन्न कराए जा रहे हैं। आयोग से जेई भर्ती की परीक्षा हो गई है। परीक्षा परिणाम आने के बाद ही जिले में जेई के नए पद भरने की उम्मीद है।
सीएस देवड़ी, ईई जल संस्थान बागेश्वर।