बागेश्वर। डीएम अनुराधा पाल के निर्देश पर पेट्रोल पंप की छानबीन के दौरान भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। निरीक्षण में बागेश्वर के जय अंबे ऑयल्स में महिला प्रसाधन (शौचालय) नहीं पाया गया और न पंप में पानी की व्यवस्था थी। वाहनों के टायरों में हवा भरने के लिए लगाई गई मशीन (कंप्रेशर) पर ताला लटका मिला। जिला पूर्ति अधिकारी ने पंप संचालक पर दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
पूर्ति विभाग से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि डीएम के निर्देश पर जिला पूर्ति अधिकारी मनोज बर्मन के नेतृत्व में कई पेट्रोल पंपों की औचक जांच में यह खामी पाई गई। पंप संचालक को 15 दिन के भीतर पानी की व्यवस्था और महिला प्रसाधन बनाने के निर्देश बनाने के निर्देश दिए गए। अशोका फिलिंग स्टेशन ताकुला रोड बागेश्वर में पीने के पानी की व्यवस्था और हवा मशीन की व्यवस्था ठीक नहीं पाई गई। पानी की व्यवस्था ठीक रखने और हवा मशीन का लाभ ग्राहकों को देने के निर्देश दिए गए। बागनाथ फ्यूल्स बिलौना में प्रसाधन की सफाई ठीक नहीं पाई गई। पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। सफाई और पानी की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण टीम में पूर्ति निरीक्षक रवींद्र कुमार बिष्ट शामिल थे।
इन पंपों पर व्यवस्था मिली दुरुस्त
बताया गया है कि परिहार फिलिंग स्टेशन द्यांगण, कोहली फिलिंग स्टेशन कांडाधार बागेश्वर, बालाजी फ्यूल्स फलटनियां में पुरुष-महिला प्रसाधन, पानी की व्यवस्था और हवा मशीन की व्यवस्था सही पाई गई। डीएसओ बर्मन ने अवगत कराया है कि औचक निरीक्षण के दौरान पंपों पर पेट्रोल और डीजल की जांच की गई। तेल की गुणवत्ता सही पाई गई। पर्यटक सीजन को देखते हुए पंपों में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडारण करने के निर्देश पंप संचालकों को दिए गए हैं।
डीएम आदेश न देतीं तो हाथ पर हाथ धरे रहते?
बागेश्वर। पेट्रोल पंप में तेल की गुणवत्ता दुरुस्त रखने, पीने के पानी, शौचालय, वाहनों में हवा भरने की सुविधा ग्राहकों को उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार पूर्ति विभाग के अधिकारी जिलाधिकारी अनुराधा पाल के आदेश के बाद हरकत में आए हैं। शायद डीएम आदेश न देतीं तो अधिकारी हाथ पर हाथ धरे रहते? सभी पंप का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जांच में खामी पाए जाने पर तीन दिन के भीतर दो पंप संचालकों पर दस-दस हजार का जुर्माना लगाया गया। दोनों दिन जुर्माने की रकम छुपाई गई। न तो पूर्ति विभाग की विज्ञप्ति में जुर्माने की राशि का उल्लेख था, और न सूचना विभाग से जारी से जारी विज्ञप्ति में। दोनों दिन डीएसओ मनोज बर्मन को फोन कर जुर्माने की राशि पता करनी पड़ी। जुर्माने की राशि तक सार्वजनिक न करने के पीछे मंशा क्या है, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बागेश्वर के पेट्रोल पंप में जांच करते अधिकारी।