जोगाबाड़ी की गुफा में उभरी सुंदर आकृतियां व झील।
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एक ओर सरकार द्वारा पर्यटन से आय और रोजगार बढ़ाने के दावे किए जाते हैं। दूसरी ओर पर्यटन की संभावनाओं वाले खूबसूरत स्थलों की घोर उपेक्षा की जा रही है। इसका उदाहरण बागेश्वर जिले की जोगाबाड़ी की प्राकृतिक गुफा है। इसके अंदर बहता सुंदर झरना, छोटी सी झील सहित तमाम खूबियों के बावजूद इसके विकास को लेकर कोई पहल नहीं हुई है। कांडा बाजार से लगभग तीन किमी नीचे जोगाबाड़ी की गुफा स्थित है। गुफा का प्रवेश द्वार अत्यधिक संकरा है। इस गुफा की लंबाई लगभग 10 मीटर, चौड़ाई छ: मीटर तथा ऊंचाई तकरीबन सात फीट है। गुफा के अंदरूनी छोर से एक झरना बहता है, जिससे गुफा हमेशा ही झील की तरह लबालब भरी रहती है। गर्मियों में भी यहां दो फीट तक पानी रहता है। झरने का यह पानी स्थानीय नाले से होता हुआ भद्रकाली नदी में मिल जाता है। इस गुफा में सबसे हैरत में डालने वाली चीजें सफेद और कुछ अन्य रंगों की चट्टानों पर बनी आकृतियां हैं। गुफा की दीवारों से लेकर छत तक ऐसी दर्जनों आकृतियों से भरी पड़ी है, जो ब्रह्मकमल, शेषनाग, शिव, ब्रह्मा, विष्णु तथा अन्य देवी-देवताओं और प्राकृतिक चीजों जैसी नजर आती हैं। इस गुफा की आकृतियां लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर देती हैं। लगभग छह साल पहले इस गुफा को खोजने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन माजिला लगातार इस स्थल के विकास की मांग कर रहे हैं। गुफा के सौंदर्यीकरण के लिए तीन वर्ष पूर्व पर्यटन विभाग की ओर से 45 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन सिंह का कहना है कि गुफा के सौंदर्यीकरण के लिए डीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा गया है। यदि जोगाबाड़ी की गुफा का सौंदर्यीकरण हुआ तो पर्यटक यहां आएंगे। इससे क्षेत्र का विकास होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।