दर्शन कुमार की बनाई मां महाकाली की मूर्ति। संवाद
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बागेश्वर। कला किसी स्थान या व्यक्ति विशेष की मोहताज नहीं होती। कलाकार कहीं भी पैदा हो सकता है। इस बात को चरितार्थ किया है जिले के पुंगर घाटी के नाघर के दर्शन कुमार ने। दर्शन को सीमेंट की मूर्ति बनाने में महारथ हासिल है। दर्शन ने महाकाली की जीवंत मूर्ति तैयार की है, जिसे वह सोमवार को गंगोलीहाट के हाट कालिका मंदिर को समर्पित करेंगे।
नाघर निवासी कुंदन राम के बेटे दर्शन कुमार राजकीय महाविद्यालय बनलेख (दुगनाकुरी) में बीए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। दर्शन की मां महाकाली पर अगाध श्रद्धा है। दर्शन बताते हैं कि उन्हें मां काली की मूर्ति बनाने की प्रेरणा स्वप्न से मिली। कोविड लॉकडाउन में विद्यालय बंद थे। उन्होंने इस समय का उपयोग मां महाकाली की मूर्ति निर्माण के लिए उपयुक्त समझा और मूर्ति बनाने का निर्णय लिया।
सीमेंट और लोहे की मदद से महाकाली की मूर्ति बनाने का काम शुरू किया। सीमेंट और लोहा जुटाने में कुछ दिक्कत आईं लेकिन उनके पिता जो कि स्वयं मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरणपोषण करते हैं। पिता की मदद से मूर्ति का निर्माण करने में सफल रहे। मूर्ति बनकर तैयार हो गई है। दर्शन ने बताया कि वह 28 नवंबर को मूर्ति गंगोलीहाट के हाट कालिका मंदिर को समर्पित करेंगे।
पुंगरघाटी विकास मंच करेगा सम्मानित
बागेश्वर। दर्शन की कला से पुंगरघाटी विकास मंच भी प्रभावित है। विकास मंच के हरीश कालाकोटी ने बताया कि दर्शन को पुंगरघाटी विकास मंच की ओर से सम्मानित किया जाएगा।