बागेश्वर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बागेश्वर नगर की सड़कों, नदी तटों और सरकारी संपत्ति से अतिक्रमण हटने की उम्मीद जागी है। बागेश्वर में राजमार्ग, सड़क तो छोड़िए, नदियों के तट भी अतिक्रमण से अछूते नहीं हैं। सरयू नदी के तट पर बड़ी-बड़ी इमारतें बना दी गई हैं।
हाईकोर्ट ने बीते बुधवार को राजमार्ग, सड़क, वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं। डीएम, डीएफओ से चार हफ्ते में क्रियान्वयन रिपोर्ट मांगी है। बागेश्वर जिला मुख्यालय अतिक्रमण की चपेट में है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण किया गया है। राजमार्ग पर कब्जा कर भवन बना दिए गए हैं। सड़क की दीवारों, निकास नालियों के ऊपर पक्के निर्माण बने हुए हैं। अतिक्रमण के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ अन्य सड़कें सिकुड़ गई हैं। संकरी हो गई हैं। यह जाम का बड़ा कारण बन रहा है।
जिला मुख्यालय में सरयू नदी के तट पर बनी बड़ी-बड़ी इमारतें नियम-कानून को ठेंगा दिखा रही हैं। सरयू नदी के तट अतिक्रमण की चपेट में हैं। प्रशासन की कार्रवाई अतिक्रमणकारियों को नोटिस देने से आगे नहीं बढ़ती। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कई अतिक्रमणकारियों के खिलाफ निचले न्यायालयों में वाद भी चल रहे हैं। सवाल यही है कि क्या अब बागेश्वर अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त होगा।
2018 में भी चिह्नित किए थे अतिक्रमण
बागेश्वर। वर्ष 2018 में हाईकोर्ट के आदेश पर बागेश्वर नगर क्षेत्र में प्रशासन और नगरपालिका की संयुक्त टीम ने अतिक्रमण चिह्नित किए थे। तहसील से पूर्व में मिली सूचना के अनुसार 148 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे लेकिन अतिक्रमण हटाने की जहमत नहीं उठाई गई। संवाद
बोले डीएम-डीएफओ, होगा आदेश का पालन
बागेश्वर। जिलाधिकारी अनुराधा पाल ने हाईकोर्ट के आदेश मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। राजमार्ग, नदियों के किनारे किया गया अतिक्रमण हटाया जाएगा। डीएफओ उमेश चंद्र तिवारी ने भी हाईकोर्ट का आदेश मिलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में वन भूमि से अतिक्रमण हटाया जाएगा। नदियों के तट अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराए जाएंगे। संवाद