बागेश्वर। जिले में अब भी कुपोषण के मामले देखने को मिल रहे हैं। पिछले पांच साल में 142 बच्चों के कुपोषित होने की बात सामने आई है। 73 बच्चों को अति कुपोषित पाया गया। अच्छी बात यह है कि 97 बच्चे कुपोषण से बाहर निकाल लिए गए हैं।
कुपोषित बच्चों को खाद्य सामग्री मुहैया कराई जा रही है। इसके बावजूद हर साल कुपोषित, अतिकुपोषित बच्चों के मामले सामने आ रहे हैं। बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच सालों में 2020 में सर्वाधिक 46 कुपोषित बच्चे पाए गए। वहीं 2022 में सर्वाधिक 27 अतिकुपोषित बच्चे पाए गए हैं। हालांकि पांच सालों में 97 बच्चों को सामान्य स्थिति में लाया गया है। संवाद
सामान्य स्थिति में लाने के प्रयास
बागेश्वर। आंगनबाड़ी केंद्रों में अभिभावकों को एकत्र करके पोषण के बारे में जानकारी दी जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चिह्नित बच्चों के घर जाकर डाइट चार्ट तैयार करती हैं। स्वास्थ्य विभाग की मदद से इन बच्चों की जांच की जाती है और बच्चों को चिकित्सा सुविधा दी जाती हैं। संवाद
कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों में अंतर
बागेश्वर। लंबे समय से शरीर को आवश्यक संतुलित आहार न मिलने के कारण बच्चों में कुपोषण हो जाता है। जबकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाने से बच्चे अतिकुपोषण के शिकार हो जाते हैं जिससे बच्चे जल्दी बीमारियों की चपेट में आने लगते हैं। अतिकुपोषण की श्रेणी में आने वाले बच्चों के बीमारियों के कारण मौत का खतरा रहता है। संवाद
वित्तीय वर्ष- कुपोषित बच्चे - अतिकुपोषित बच्चे -सामान्य में लाए गए बच्चे
2020-21 46 11 19
2021-22 29 19 26
2022-23 39 27 27
2023-24 19 14 20
2024-25 9 2 5
कुल 142 73 97
हर महीने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की लंबाई और वजन नापा जाता है। माताओं को डाइट चार्ट के हिसाब से बच्चों को भोजन देने को कहा जाता है। सही देखभाल से बच्चा जल्दी ही कुपोषण की श्रेणी से बाहर आ जाता है।
रेनू नगरकोटी, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी, बागेश्वर