बागेश्वर। जिले में दुर्गम क्षेत्रों के लोगों की सेहत भगवान भरोसे है। ऐसे में जिले के हिमालय की तलहटी में बसे खाती गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) टाइप-वन अपवाद बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि इस अस्पताल को हंस फाउंडेशन अपने खर्च पर संचालित कर रहा है। पिछले चार साल से हिमालयी क्षेत्र से सटे इलाकों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है।
वर्ष 2018 तक खाती गांव में स्वास्थ्य विभाग की ऐलोपैथिक डिस्पेंसरी संचालित होती थी। एक फार्मासिस्ट वहां तैनात रहता था। वर्ष 2018 में ही हंस फाउंडेशन का खाती के अस्पताल को संचालित करने के लिए सरकार के साथ अनुबंध हुआ। तय हुआ कि अस्पताल के सारे खर्च हंस फाउंडेशन उठाएगा। अस्पताल का भवन जर्जर था। फाउंडेशन ने सत्रह लाख रुपये की लागत से भवन की मरम्मत की। अगस्त 2019 से खाती में पीएचसी का संचालन कर दिया।
हिमालयी क्षेत्र के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधा मिलने लगी। अस्पताल की लैब में शुगर, टाइफाइड, ब्लड, यकृत, फेफड़े, लीवर समेत 36 वाह्य जांचें निशुल्क होतीं हैं। अस्पताल में एक एमबीबीएस डॉक्टर, एक आयुष डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक लैब तकनीशियन, पांच एएनएम, दो जेएनएम, तीन सहयोगी कर्मी तैनात हैं। अस्पताल में निशुल्क इलाज के साथ ही मुफ्त दवा दी जाती है। अस्पताल में प्रसव की सुविधा मिल रही है। वर्ष 2022 में अस्पताल में पांच सुरक्षित प्रसव हुए थे।
खाती के साथ ही अन्य गांवों को मिल रही सुविधा
बागेश्वर। खाती के साथ ही सोराग, धूर, बदियाकोट, वाछम, किलपारा, कुंवारी समेत हिमालयी क्षेत्र के कई गांवों को स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है।
खाती के अस्पताल का अनुबंध दिसंबर 2023 तक है। अस्पताल का सारा खर्च डॉक्टर, कर्मचारियों के वेतन समेत हंस फाउंडेशन उठाता है। अस्पताल में ब्रांडेड कंपनी की दवाओं के साथ ही जेनेरिक दवाएं उपलब्ध रहती हैं। लोगों का निशुल्क इलाज होता है। - एनबी अवस्थी, कंसल्टेंट, हंस फाउंडेशन।