बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने चिटफंड कंपनी बनाकर जमाकर्ताओं, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों से धोखाधड़ी करने के आरोपी कंपनी के एमडी और सीएमडी को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। आरोपी पति-पत्नी को एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। न्यायालय ने कंपनी पर 30 लाख रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया और जुर्माने की राशि जमा करने पर संबंधित खाताधारकों की उचित शिनाख्त के बाद अवशेष प्रतिपूर्ति करने का आदेश पारित किया।
डुंगरगांव निवासी ललित मोहन सिंह परिहार ने डीएम को आधार मल्टीपल प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, अवध प्लाजा, बीएन रोड लालबाग, लखनऊ के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। वादी मुकदमा की शिकायत के अनुसार कंपनी कृषि क्षेत्र में पैरा बैंकिंग का कार्य करती थी। कंपनी का मुख्य कार्य सदस्य बनाकर उनके मध्य लेनदेन, खाते खोलना, सदस्यों को लोन देना, स्थानीय स्तर पर सर्वे करके प्रोजेक्ट बनाना शामिल था।
शिकायती पत्र में कंपनी का कार्यालय तहसील मार्ग पर बताया गया और वादी ने स्वयं की कंपनी में प्रबंधक के पद पर नियुक्त होना बताया था। वादी के अनुसार कंपनी ने सदस्य बनाकर दैनिक खाते खोले और एफडी भी बनवाई, लेकिन खाते और एफडी की परिपक्वता होने पर उपभोक्ताओं को राशि नहीं लौटाई। एक साल तक लगातार वादी ने ग्राहकों का रुपया वापस लौटाने की मांग की, लेकिन कंपनी के एमडी अभय श्रीवास्तव और सीएमडी दीपा श्रीवास्तव ने रकम वापस नहीं लौटाई।
डीएम को दी गई शिकायत के आधार पर कोतवाली में आरोपी एमडी और सीएमडी के खिलाफ धारा 120 बी, 420, 405 और धारा तीन के तहत केस दर्ज किया गया। न्यायालय में अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता गोविंद बल्लभ उपाध्याय और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंचल सिंह पपोला ने मामले की पैरवी करते हुए 18 गवाह पेश कराए।
न्यायालय ने आरोपी श्रीवास्तव दंपती को धारा तीन के तहत सजा और अर्थदंड की सजा सुनाई। आरोपियों को अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह-छह महीने का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा। न्यायालय ने अन्य धाराओं में पति-पत्नी को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार न्यायालय ने धारा-3 उत्तरांचल निषेयक (जमाकर्ता) हित संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत प्रदेश का पहला अहम निर्णय पारित किया है।
24 लाख रुपये की धोखाधड़ी का था मामला
बागेश्वर। आधार कंपनी के एमडी और सीएमडी के खिलाफ 24 लाख रुपये के धोखाधड़ी का मामला था। वादी मुकदमा के अनुसार कंपनी में खाताधारकों को 19 लाख रुपये से अधिक जमा था। 60 हजार रुपये कार्यालय का किराया बाकी था और कर्मचारियों को छह महीने से वेतन नहीं दिया गया था। संवाद