बागेश्वर। जिले में इस बार मौसम की मेहरबानी से वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगा है। मार्च और अप्रैल में बरस रहे मेघ ने वन विभाग के कर्मचारियों को राहत दी है। फायर सीजन की शुरुआत से अब तक केवल नौ बार जंगल जले हैं जबकि पिछले साल 29 अप्रैल तक जंगल जलने की 139 घटनाएं दर्ज हो चुकीं थीं।
फायर सीजन का समय काल 15 फरवरी से 15 जून के बीच रहता है। फरवरी में धीरे-धीरे पारा चढ़ता है तो वनाग्नि की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं। अप्रैल, मई में जंगल जलने के सर्वाधिक मामले सामने आते हैं। इस साल मौसम में हो रहे बदलाव के कारण फिलहाल वनों के जलने के आंकड़ों में कमी आई है। हालांकि वनाग्नि की सबसे कम घटनाएं 2020 में दर्ज हुईं थी। उस साल वनाग्नि काल के दौरान कोरोना महामारी चरम पर थी और संक्रमण से बचने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगा था। लॉकडाउन के चलते वन भी सुरक्षित रहे और पूरे वनाग्नि काल में जंगलों के जलने की केवल चार घटनाएं हुईं। बारिश के चलते इस साल अब तक तो जंगल सुरक्षित हैं, लेकिन आने वाले महीनों में बारिश कम होगी तो वनाग्नि की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
इनसेट
पांच साल में वनाग्नि की घटनाएं और नुकसान
वर्ष-वनाग्नि की घटनाएं-क्षेत्रफल-नुकसान
2019- 120- 184.17 हेक्टेयर- 4,14,382 रुपये
2020- 04- 5.25 हेक्टेयर- 15,750 रुपये
2021-182- 272.27 हेक्टेयर- 7,92,410 रुपये
2022- 166- 236.78 हेक्टेयर- 7,17,740 रुपये
2023- 09 - 8.90 हेक्टेयर- 26,700 रुपये (आंकड़े 29 अप्रैल तक के हैं)
कोट
इस साल अब तक वनाग्नि की कोई बड़ी घटना जिले में नहीं हुई है। विभाग की ओर से वनाग्नि सुरक्षा की पूरी तैयारी की गई है। आग बुझाने के लिए ड्रोन, फायर ब्लोअर आदि उपकरण भी उपलब्ध हैं। विभाग की ओर से लोगों को भी वनाग्नि सुरक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ, बागेश्वर