बागेश्वर। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित जिले के ग्राम रीमा निवासी दृष्टिबाधित लोक गायक पूरन राठौर केरल में आयोजित अमृत कला उत्सव में शिरकत कर घर लौट आए हैं। इस तीन दिनी आयोजन के अंतिम दिन उन्होंने राजुला मालूशाही की प्रस्तुति देकर मौजूद लोगों का मन मोहा। दक्षिण भारत के किसी राज्य में यह उनका पहला मंचीय कार्यक्रम था।
आजादी का अमृत महोत्सव के तहत केरल में दो से चार मार्च तक अमृत कला उत्सव आयोजित किया गया था। इसमें संगीत नाटक एकेडमी से सम्मानित कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। इसके लिए जिले से पूरन के साथ ढोलक वादक, हारमोनियम वादक, बांसुरी वादक, कोरस गायकों की टीम गई थी।
फोन पर हुई बातचीत में पूरन ने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली से केरल तक हवाई यात्रा का प्रबंध किया गया था। उनका कार्यक्रम चार मार्च को हुआ। इसमें उन्होंने प्रदेश के प्रमुख देवगीत दैंणा होया खोली का गणेशा से कार्यक्रम की शुरुआत की और जागर विधा के माध्यम से राजुला मालूशाही का चित्रण किया। वहां मौजूद लोगों ने प्रदेश की इस कला को बेहद सम्मान दिया। पूरन ने बताया कि युवा पुरस्कार जीतने और प्रधानमंत्री से सराहना मिलने से उनकी जिंदगी सुधरने लगी है। आने वाले समय में वह देश और विदेश में भी प्रदेश की लोक कला को पहुंचाने का प्रयास करेंगे।