मकान क्षतिग्रस्त होने से किसी तरह जुगाड़ के ठिकाने पर समय काट रहा परिवार
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बागेश्वर जिले के काफलीगैर के आपदा प्रभावित सिया गांव की 62 वर्षीय भगवती देवी हताश है। बात करते हुए उसका गला भर आता है। अबकी बरस आसमान कुछ ऐसा बरसा कि उसके परिवार के सिर पर छत नहीं रही। मदद के वादे तो बहुत हुए पर अब सिस्टम ने आंखें फेर ली हैं। रेडक्रॉस के कंबल के सहारे आशंकाओं के बीच भगवती की रातें गुजर जाती हैं।
इसी साल 26 अगस्त की रात को मानसून के बादल भगवती के घर पर कहर बनकर बरसे। मूसलाधार बारिश में उसका मिट्टी-पत्थर का पुराना मकान भरभराकर गिर पड़ा। यही पुराना घर भगवती, उसके पति मोहन लाल, बेटे मनोज और उसकी पत्नी के अलावा दो छोटे बच्चों की पूरी दुनिया था। प्रकृति की मार के बाद पूरा परिवार दूसरे बेटे अनिल कुमार के छोटे से घर में शरण लेने पहुंचा। किसी तरह दिन गुजर रहे थे लेकिन फिर वहां जगह की कमी के कारण बुजुर्ग दंपती को जर्जर घर में वापस लौटना पड़ा।
दो महीने गुजर जाने के बाद भी सरकार की मदद अब तक उनके आंगन तक नहीं पहुंची है। पहाड़ की सर्द रातों में ये लोग ठंडी हवाओं और आशंकाओं के आगोश में सिमटकर रातें गुजार रहे हैं। परिवार ने टिन शीट डालकर जुगाड़ किया है मगर यह नाकाफी है। ठंड बढ़ने के साथ जीवन मुश्किल होता जा रहा है। भगवती देवी हर सुबह अपने आंगन में खड़े होकर आधा ढहे मकान देखती है। फिर खुद को ढांढस बंधाती है कि कोई मंत्री-संत्री एक दिन उनकी मदद को आएगा।
ये वही घर है जिसमें हमारा जीवन कटा। बच्चों की परवरिश हुई। यही हमारा सहारा है। आपदा में घर टूटा तो मदद के वादे हुए थे। बाद में सब भूल गए। दो महीने पहले राजस्व टीम ने निरीक्षण किया था लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला। रेडक्रॉस से मिले तिरपाल और कंबल ही हमारा सहारा है। -भगवती देवी, आपदा पीड़ित
परिवार टूटी दीवारों और टिन की छत के नीचे रहने को मजबूर है। विभाग ने सर्वे किया है, पर मदद कब मिलेगी यह कोई नहीं बता रहा। हमने प्रशासन से जल्द राहत देने की मांग की है। -डौली देवी, ग्राम प्रधान
सिया गांव में क्षतिग्रस्त मकान के बारे में जानकारी है। उसका निरीक्षण कराया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित को जल्द से जल्द मदद मुहैया कराई जाएगी। -दलीप सिंह, तहसीलदार, बागेश्वर