बागेश्वर। उत्तराखंड में पहाड़ी आरक्षण को लेकर सोशल मीडिया पर मुहिम शुरू हो गई है। पहाड़ के लोगों को आरक्षण के दायरे में लाने की मांग काफी समय से की जा रही है लेकिन इस समय ट्विटर/एक्स पर यह मांग काफी ट्रेंड कर रही हैं। इस पर बहस छिड़ी हुई है।
बीते रविवार को एक्स पर उत्तराखंड के पहाड़ी समाज के लोगों ने पहाड़ी आरक्षण के पक्ष में जमकर ट्वीट किए हैं। हजारों ट्वीट के माध्यम से लोगों ने अपना पक्ष रखते हुए इस बात को उठाया है कि उत्तराखंड के पहाड़ी समाज के लिए आरक्षण क्यों आवश्यक है। थोड़ी ही देर में ट्वीट करने वालाें की संख्या बढ़ गई। इन दिनों पहाड़ी आरक्षण हैशटैग खूब चर्चा में है।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके के लोग राज्य बनने से पहले से हिल रिजर्वेशन (पहाड़ी आरक्षण) की मांग उठाते रहे हैं। सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ने वाले लोग उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके के लोगों को ओबीसी आरक्षण देने की मांग मुखर कर रहे हैं। हाल ही में बिहार में हुई जातीय जनगणना और ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की मांग के बाद पहाड़ी आरक्षण के मुद्दे को और बल मिला है।
पिछड़ापन दूर करने के लिए आरक्षण जरूरी
बागेश्वर। सोशल मीडिया पर मुहिम का समर्थन कर रहे बागेश्वर के काफलीगैर क्षेत्र के प्रकाश बहुगुणा, चंदन सिंह रावत, रमाड़ी के बलवंत सिंह कार्की, कपकोट के महिमन सिंह कपकोटी का कहना है कि पहाड़ में न तो कृषि विकसित हो सकी, न ही उद्योग लगे। सेवा क्षेत्र ही पहाड़ों में रोजगार का साधन है। उसमें भी अब सीटें कम होने आदि कई समस्याएं हैं। कहते हैं कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके का पिछड़ापन दूर करने के लिए आरक्षण देना बेहद जरूरी है। संवाद