बागेश्वर। कुंवारी गांव की पहाड़ी से फिर भूस्खलन होने के कारण शंभू नदी में झील बनने का खतरा पैदा हो गया है। नदी में लगातार मलबा गिर रहा है। डीएम के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने झील में जमा मलबा हटाने की तैयारी कर ली है। रविवार को विभाग की टीम कुंवारी रवाना होगी और झील से मलबा हटाने का काम शुरू किया जाएगा।
शंभू नदी में इसी साल जून में शंभू नदी में 700 मीटर लंबी और 50 मीटर से अधिक चौड़ी झील बनने की जानकारी मिली थी। चार साल से झील का विस्तार हो रहा था। हालांकि झील किसी प्रकार का खतरा बनती, उससे पहले ही जानकारी मिलने पर सिंचाई विभाग के श्रमिकों और एसडीआरएफ की टीम ने झील के मुहाने पर जमा मलबा हटाकर खतरे को टाल दिया था। अब फिर से कुंवारी गांव की पहाड़ी से भूस्खलन होने से नदी में मलबा जमा होने लगा है।
साल दर साल दरक रहा है कुंवारी का पहाड़
2013 में कुंवारी गांव की पहाड़ी दरकने की शुरुआत हुई थी। पहाड़ी के टूटने से गांव भी खतरे की जद में आ गया था।
76 परिवारों को विस्थापन के लिए प्रशासन ने जांच के बाद चुना। 18 अति संवेदनशील परिवारों के विस्थापन के लिए रकम स्वीकृत हुई
08 परिवार किलपारा, बमसेरा में विस्थापित हुए, 10 परिवारों ने मनमर्जी जमीन न मिलने की बात करते हुए अन्यत्र जाने से किया इनकार
2018 में फिर से गांव की पहाड़ी से भूस्खलन शुरू हो गया। चार साल तक लगातार भूस्खलन ने शंभू नदी की राह रोक दी
2022 फिर गांव की पहाड़ी दरकने लगी है और मलबा शंभू नदी में जा रहा है, जिससे फिर से झील आकार लेने लग गई है।
कुंवारी गांव की पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन पर प्रशासन नजर बनाए हुए है। फिलहाल भूस्खलन से गांव को खतरा होने की बात सामने नहीं आई है। नदी में जमा हो रहे मलबे को हटाने का काम सिंचाई विभाग के माध्यम से कराया जाएगा। गांव के चयनित परिवारों को विस्थापित करने के लिए भी कार्यवाही चल रही है।
मोनिका, एसडीएम कपकोट
डीएम ने झील का निरीक्षण कर मलबा हटाने के निर्देेश दिए हैं। विभाग को झील से मलबा हटाने के लिए पूर्व में 9.35 लाख रुपये की राशि मिली थी। पहले भी मलबा हटाया गया। अब भी बजट उपलब्ध है। शंभू नदी से मलबा हटाने के लिए रविवार को टीम रवाना की जाएगी। - जेएस बिष्ट, एई, सिंचाई विभाग कपकोट