दो वन्यजीव तस्करों पर वन्यजीव जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का आरोप सिद्ध हो गया। सिविल जज जूनियर डिवीजन की न्यायिक मजिस्ट्रेट गरुड़ नेहा कुशवाहा ने उन्हें तीन-तीन साल के कठोर कारावास समेत 10 हजार रुपये के अर्थदंड की भी सजा सुनाई है।
गरुड़ क्षेत्र के मुखबिर ने 27 जून 2012 को पुलिस, जंगलात को वन्यजीव की खाल तस्करी की सूचना दी। इस आधार पर बैजनाथ के रैंजर राम सिंह बिष्ट, गढ़खेत हरीश खर्कवाल, पुलिस चौकी डंगोली के एसआई बचे सिंह बिष्ट, कांस्टेबल सीपी उम्मेद सिंह, एसआई भूपेंद्र सिंह एचसीपी जगत सिंह की टीम बनी।
इस टीम ने 1:20 बजे कुमाऊं रेस्टोरेंट टीट बाजार के पीछे से पिंगलो निवासी बलवंत नाथ को मोटरसाइकिल समेत पकड़ा जबकि ग्राम कोटफुलवाड़ी मेलाडुंगरी निवासी उसका साथी प्रकाश राम मौके से भाग गया। बलवंत की तलाशी लेने पर उसके कंधे पर लटके काले, लाल रंग के बैग के अंदर रोल बनाकर रखी तेंदुए की एक खाल मिली।
जिसकी लंबाई चार फीट पांच इंच, चौड़ाई एक फीट चार इंच थी। इसके आगे के दाहिने तरफ के टांग की खाल नहीं थी। तेंदुए की मूंछ भी खाल से अलग थी। बरामद खाल, करीब डेढ़ साल पुरानी थी। खाल का रंग लाल सफेद चित्तीदार था। पुलिस पार्टी ने आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 51, 57 के तहत मुकदमा दर्ज किया।
मौके से भागे आरोपी प्रकाश राम ने कुछ समय बाद न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। मामले की प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने वन विभाग बागेश्वर को विवेचना स्थानांतरित की। विवेचक एसडीओ सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी ने मामले की जांच पूरी कर दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने पत्रावली का अध्ययन कर दोनों पक्षों को सुना। वन विभाग के अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने न्यायालय में आठ गवाह परीक्षित कराए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों अभियुक्तगणों को दोष सिद्ध मानते हुुए दंडित करने के आदेश पारित हुए।