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फर्जी वेबसाइट से परिवहन टैक्स चोरी करने वाला एक गिरफ्तार

Thu, 06 Jun 2019 12:38 AM IST
दीपक नेगी बागेश्वर। 
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बागेश्वर में टैक्स चोरी कांड का खुलासा करते एसपी लोकेश्वर सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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फर्जी वेबसाइट बनाकर परिवहन टैक्स चोरी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं एक अन्य अभियुक्त फरार हो गया है। पुलिस ने आरोपी के पास से लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य उपकरण बरामद कर उसे जेल भेज दिया है।

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एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि एआरटीओ कृष्ण गिरी चंद्र ने तीन जून कांडा रोड पर शिफ्ट डिजायर (पीबी/01/बी/3237) की तलाशी ली। इस पर वाहन चालक पंजाब के रोपड़ जिले में स्थित चौंता गांव निवासी पवन पुत्र फुमन सिंह ने उन्हें उत्तराखंड में प्रवेश की टैक्स की रसीद दी। एआरटीओ ने रसीद देखी तो यह फर्जी निकली। इस संबंध में एआरटीओ कृष्ण गिरी चंद्र ने तीन जून को कोतवाली बागेश्वर में अज्ञात के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया। मामले में पुलिस उपाधीक्षक महेश चंद्र जोशी के निर्देशन में टीम गठित की गई और वाहन चालक से मिली जानकारी के आधार पर टैक्स जमा करने वालों की तलाश में यूपी पहुंची। हापुड़ बाईपास के पास स्थित होटल के कमरे में टीम को एक व्यक्ति लैपटॉप से वाहनों का टैक्स जमा करता मिला। 

पूछताछ में उसने अपना नाम करतार सिंह उर्फ राजू पुत्र बच्चू सिंह निवासी पलवल, हरियाणा बताया। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह फर्जी पोर्टल बनाकर वाहन चालकों से टैक्स जमा कर पैसे लेता है। इस पर पुलिस ने करतार सिंह को लैपटॉप सहित उपकरणों के साथ गिरफ्तार कर बुधवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। वहीं मामले में गिरोह का सरगना पलवल हरियाणा निवासी धीरज अब भी फरार है। टीम में एसआई मदन लाल, एसओजी प्रभारी एसआई पंकज जोशी, कांस्टेबल राकेश भट्ट, चंदन सिंह, हेम चंद्र मठपाल, महेंद्र सिंह आदि थे।
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एक से 12 हजार तक टैक्स वसूलते थे
बागेश्वर। टैक्स चोरी के मामले में पकड़ा गया करतार सिंह उर्फ राजू  15 दिनों से यह फर्जीवाड़ा कर रहा था। वह प्रतिदिन एक वाहन से एक हजार से 12 हजार रुपये तक टैक्स वसूलता था।

ऐसे करते थे टैक्स चोरी
बागेश्वर। करतार सिंह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट से गाड़ी का डिटेल उठाकर अपनी फर्जी साइट जेएमडी कलैक्ट डॉट इन (jmdcollect.in/login) में वाहनों का डिटेल कॉपी कर गाड़ियों के फर्जी टैक्स रसीद तैयार करता था। इसके एवज में वह वाहन चालकों से पैसा लेता था। इससे परिवहन विभाग को भारी राजस्व की चपत लग रही थी। 

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