विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पॉक्सो एक्ट के अभियुक्त को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अलग-अलग धाराओं में अभियुक्त पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर पांच माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
विशेष सत्र न्यायाधीश जिला जज धनंजय चतुर्वेदी की अदालत में चले मुकदमे में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक खड़क सिंह कार्की ने आठ गवाह पेश किए। गवाहों और दलीलों को सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने अभियुक्त जानकी प्रसाद को पॉक्सो एक्ट में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
उस पर दो हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं देने पर दो माह की अतिरिक्त कैद होगी। दफा 363 में तीन साल की कैद और 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद होगी। इसके अलावा दफा 366 ए में पांच साल की कैद और 2000 रुपये जुर्माना तथा अर्थदंड नहीं देने पर 2 माह अतिरिक्त कैद की सजा सुनाई। मामले में कोर्ट मुहर्रिर राजेंद्र नाथ गोस्वामी ने पैरवी की थी।
ये था मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 27 अप्रैल 2017 को गरुड़ के एक गांव की 10वीं की छात्रा स्कूल के लिए निकली थी लेकिन शाम तक घर नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कहीं सुराग नहीं लगा। छह मई 2017 को छात्रा के पिता ने राजस्व पुलिस में जानकी प्रसाद पुत्र जोगाराम निवासी उड़खुली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मामला बैजनाथ थाना पुलिस को हस्तांतरित किया गया। मामले की विवेचना दरोगा मोहन चंद्र पलड़िया को सौंपी गई। इधर पुलिस ने 29 जनवरी 2019 को मुंबई के बसई से छात्रा को जानकी प्रसाद के साथ बरामद कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दफा 363, 366 ए, 376 और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया और आरोपी को अल्मोड़ा जेल भेज दिया।