बागेश्वर। वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बावजूद बीमा का दावा निरस्त करने वाली बीमा कंपनी को उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से झटका लगा है। आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 45 दिन के भीतर 55,575 रुपये का एकमुश्त भुगतान करने का आदेश दिया। तय समय के भीतर भुगतान नहीं करने पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान की तिथि तक अदा करना होगा।
कथानक के अनुसार हरीश सिंह पुत्र भूपेंद्र सिंह निवासी घिंघारूतोला ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी तहसील रोड, बागेश्वर से 16 जनवरी 2019 को अपने मैक्स वाहन संख्या यूके 02टीए 0527 का 1,95,000 रुपये का बीमा कराया था, जिसकी वैधता अवधि 15 जनवरी 2020 तक थी। 19 मई 2019 को वाहन सिरौली मोटर मार्ग से करीब 75 मीटर नीचे गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के समय वाहन को शिकायतकर्ता स्वयं चला रहा था। हादसा रात के समय वाहन के सामने अचानक जंगली जानवर के आने से हुआ था। गिरने के कारण वाहन में काफी क्षति हुई। वाहन मालिक ने बीमा कंपनी को सूचना दी। बीमा कंपनी की ओर से वाहन की स्वयं मरम्मत कराने को कहा गया। शिकायतकर्ता ने वाहन की मरम्मत कराने के बाद 74,100 रुपये के खर्च का बिल बीमा कंपनी को भेजा। 28 अगस्त 2019 को बीमा कंपनी ने उसका दावा निरस्त कर दिया।
वाहन मालिक ने दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी हल्द्वानी, नैनीताल और दि न्यू इंडिया इंश्याेरेंस कंपनी तहसील रोड बागेश्वर के खिलाफ आयोग में परिवाद दाखिल किया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुंडल सिंह धपोला की ओर से मामले की पैरवी की गई। आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल, सदस्य रमेश चंद्र सनवाल और हंसी रौतेला ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता की ओर से दुर्घटनाग्रस्त बीमित वाहन की मरम्मत में हुए खर्च 74,100 रुपये की 75 प्रतिशत राशि का भुगतान करने का आदेश दिया।