कोच कमलेश देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित।
बागेश्वर। खेल में जिले को अलग पहचान दिलाने वाले ताइक्वांडो कोच कमलेश तिवारी को राज्य के प्रतिष्ठित देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया। देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें सम्मानित किया। पूर्व में राष्ट्रीय ताइक्वांडो टीम के कोच रह चुके तिवारी अब भी प्रदेश की टीम के कोच हैं।
जिले के 65 खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और 12 खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराने वाले कोच तिवारी का चयन वर्ष 2020-21 के द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए हुआ था। परेड ग्राउंड देहरादून के सभागार में शुक्रवार को आयोजित समारोह में खेल मंत्री रेखा आर्या, खेल सचिव अभिनव कुमार, खेल निदेशक जितेंद्र सोनकर, विधायक खजान दास की मौजूदगी में सीएम धामी ने उन्हें शॉल ओढ़ाया। तीन लाख रुपये का चेक और प्रतीक चिह्न देकर पुरस्कृत किया। कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास, जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव, विधायक सुरेश गढि़या, डीएम अनुराधा पाल, जिला क्रीड़ाधिकारी सीएल वर्मा, सीईओ गजेंद्र सौन, अनिल कार्की आदि ने खुशी जताई है।
वर्ष 1988 में शुरू किया ताइक्वांडो खेलना, 1996 से कोचिंग
बागेश्वर। राइंका तुपेड़ के शिक्षक कमलेश ने वर्ष 1988 में ताइक्वांडो खेलना शुरू किया। उन्होंने जूनियर वर्ग में राज्य स्तर पर सात और राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2001 में उन्होंने सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी की। वर्ष 1996 से उन्होंने कोचिंग की शुरुआत की। उनसे प्रशिक्षण लेकर गजेंद्र परिहार और महेंद्र परिहार ने ताइक्वांडो में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं खेलीं हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में उनके शिष्य अनिल देव, भूपेंद्र गढि़या, एशियन कैडेट्स में हेमंत गढि़या, वर्ल्ड कैडेट्स चैंपियन में भूपेश रावत ने शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है। उनके शिष्यों ने राष्ट्रीय स्तर पर 200 से अधिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 15 पदक जीते हैं।