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राधाकृष्ण को साक्षी बनाकर एक-दूजे के हुए चंद्र भाष्कर और खष्टी

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बागेश्वर के राधाकृष्ण मंदिर में विवाह की रस्म के दौरान दूल्हा-दुल्हन। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : AMAR UJALA
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बागेश्वर। कहते हैं जोड़े ऊपर वाले की मर्जी से बनते हैं और विवाह का मुहूर्त भी विधि के विधान से ही नियत होता है। इसी को साकार करते हुए बागेश्वर के चौरासी निवासी चंद्र भाष्कर और ईड़ा निवासी खष्टी लॉकडाउन के प्रतिबंधों के चलते साीमित संख्या में परिवारजनों की मौजूदगी में राधाकृष्ण मंदिर में हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए। चौरासी निवासी नरेंद्र सिंह धपोला के पुत्र चंद्र भाष्कर धपोला का विवाह ईड़ा घिंघारतोला निवासी जगदीश सिंह की पुत्री खष्टी के साथ मार्च महीने में तय हो गया था लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते लागू लॉकडाउन दोनों के विवाह में बाधा बन गया। दूल्हे चंद्र भाष्कर के मामा सुरेश राठौर ने बताया कि इस बीच भाष्कर के पिता नरेंद्र सिंह धपोला की तबियत खराब रहने लगी। दोनों परिवारों ने इसी महीने विवाह करने का फैसला लिया। पंडितों ने 30 अप्रैल का शुभ मुहूर्त निकाला। बागेश्वर के राधाकृष्ण मंदिर में विवाह करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन से विवाह के लिए अनुमति ली गई। प्रशासन ने दुल्हन पक्ष के 8 और दूल्हा पक्ष के 7 कुल 15 लोगों को विवाह में शामिल होने की अनुमति दी। बृहस्पतिवार को पंडित पवन लोहनी ने शुभ मुहूर्त में चंद्र भाष्कर और खष्टी का विवाह संपन्न कराया। दूल्हा-दुल्हन ने मॉस्क पहन, सोशल डिस्टेंस का पालन कर सात फेरे लिए। बारातियों और घरातियों ने भी सोशल डिस्टेंस का पालन किया और मॉस्क पहन कर बारात में शामिल हुए।
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