बागेश्वर में विशेष सत्र न्यायाधीश सुबीर कुमार की अदालत ने राजकीय इंटर कॉलेज भटखोला के प्रभारी प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा की हत्या के आरोपी प्रशासनिक अधिकारी नवल किशोर सोराड़ी की जमानत याचिका निरस्त कर दी है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ अपराध की गंभीर प्रकृति और चश्मदीद गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए इस स्तर पर जमानत देना न्यायोचित नहीं माना।
मामले के अनुसार 18 जुलाई 2026 की सुबह करीब 7:00 बजे भटखोला मोटर मार्ग से पैदल स्कूल जा रहे प्रभारी प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा पर विद्यालय के ही प्रशासनिक अधिकारी नवल किशोर सोराड़ी ने चाकू से जानलेवा हमला कर दिया था। हमले में गंभीर रूप से घायल टम्टा को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। घटना की रिपोर्ट शिक्षक गोकुल चंद्र की ओर से झिरौली थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धाराओं और एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।
जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने उसे निर्दोष बताते हुए मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का दावा किया और जमानत दिए जाने की मांग की। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक और वादी पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने पुरानी रंजिश और जातीय विद्वेष के चलते घटना को अंजाम दिया है। मौके से खून से सना चाकू और अन्य साक्ष्य बरामद हुए हैं तथा चश्मदीद गवाहों ने आरोपी को अपराध करते देखा है।
दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली का गहन अनुशीलन करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश ने आरोपी नवल किशोर सोराड़ी की जमानत याचिका को निरस्त करने के आदेश जारी किए।