गरुड़ (बागेश्वर)। बागेश्वर वन प्रभाग के आरक्षित और अनारक्षित वनों में चीड़ के पेड़ों से लीसा गढ़ान की प्रक्रिया बंद है। इस कारण सैकड़ों श्रमिक खाली हाथ बैठे हैं। सरकार को भी तीन माह के अंदर लाखों रुपये की राजस्व हानि हो चुकी है।
बागेश्वर वन प्रभाग के बैजनाथ, गढ़खेत, बागेश्वर, धरमघर, कपकोट आदि रेंजों में कई मेट श्रमिकों से लीसा गढ़ान का कार्य कराते थे। यह कार्य दिसंबर से मई तक होता था।शासन की नीति के अनुपालन में वन विभाग ने हर लीसा मेट से जीएसटी पंजीयन कराने के लिए कहा। जीएसटी पंजीयन कराने के बजाय लीसा श्रमिक संगठन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी।
न्यायालय ने लीसा गढ़ान के संबंध में फिलहाल निर्णय नहीं दिया है। लीसा मेट का कहना है कि वन विभाग ने पिछले वर्ष लीसा बिलों के भुगतान के समय ढाई प्रतिशत जीएसटी काटा वह भी जीएसटी के पोर्टल में नहीं दिख रहा है। बागेश्वर वन प्रभाग के डीएफओ हिमांशु बागरी ने बताया कि विभाग को न्यायालय के फैसले का इंतजार है।