बागेश्वर। जिला गठन के 25 साल बीतने के बाद भी जिले में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय का अपना परिसर अस्तित्व में नहीं आया है। एआरटीओ कार्यालय किराये के भवन में संचालित हो रहा है।
जिले की यातायात नियंत्रण व्यवस्था को संभालने वाला महकमा 25 साल से स्थायी कार्यालय के अभाव में चल रहा है। कई बार एआरटीओ कार्यालय का अपना परिसर बनाने की मांग उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक एआरटीओ कार्यालय का अपना भवन अस्तित्व में नहीं आया है।
अपना परिसर न होने के कारण लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों का परीक्षण सड़क पर करना पड़ता है। सीज किए गए वाहनों को रखने की पर्याप्त जगह तक किराए के परिसर में नहीं है। परिवहन चौकी के साथ ही कार्यालय के तमाम अनुभागों के कार्य के लिए कक्षों की कमी बनी हुई है। एआरटीओ कार्यालय के लिए जमीन चयनित है। चयनित भूमि में काफी हिस्सा वन भूमि है। वन भूमि का निस्तारण न होने से कार्यालय निर्माण की कवायद शुरू नहीं हो पा रही है।
कोट
भवन के लिए नगर के गाड़गांव के पास करीब 40 नाली भूमि चयनित की गई है। वन भूमि निस्तारण के लिए भारत सरकार के नोडल में प्रस्ताव भेजा गया है। वन भूमि का मामला निस्तारित होने के बाद भवन की डीपीआर तैयार की जाएगी।
हरीश रावल, प्रभारी एआरटीओ बागेश्वर