बागेश्वर। पहाड़ के परंपरागत लोक गायकों ने इस बार भी हुड़के की थाप पर नगर के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम पेश किए। झोड़े चांचरी में पहाड़ की संस्कृति जीवित हो उठी। गांवों से आए इन कलाकारों ने गोविंदी त्यर मैतौ को जोगी ऐ रौछा, जैसे गीत में प्राचीन पहाड़ के श्रृंगारपरक सांस्कृतिक पक्ष को पेश किया, वहीं सैनिक बहुल पहाड़ में युद्ध की विभीषिका को स्वर दिए। कुंदना कश्मीरा लड़ाई लागी और कई अन्य गीत पेश किए गए। कलाकारों ने बस स्टेशन, चौक बाजार,दुग बाजार आदि स्थानों पर पहाड़ की परंपरागत और लुप्त होती विधाओं का प्रदर्शन किया।