बागेश्वर। प्रकटेश्वर सृजन मंच की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्यकारों ने एक से बढ़कर एक रचना सुनाई। प्रकटेश्वर मंदिर सभागार में दीप पांडे की अध्यक्षता में आयोजित काव्य गोष्ठी में जगदीश दफौटी ने अपनी रचना की शुरुआत दुनिया का जल्दी ही इंसान बदलने वाला है..., संजय गुरुरानी ने वो आए याद छलके सफर खामोशी का...,दीप पांडे ने मैं जिंदगी का फलसफा ढूंढने...,डा. राजीव जोशी ने हर कदम पर तेरे बस उसकी नजर होती है..., विनोद प्रकाश ने चलो चलें हम भी अमन के कबूतर उड़ाते हैं..., भिलिंद बिष्ट ने यूं फिर से बच्चा हो जाऊं...,डॉ. कुंदन रावत ने जो हर रोज वेश बदल रहे हैं..., टीटी भाई ने हिंदी शक्ल है सहज सरल जबानों के...और कंचन सिंह ने अपनी कविता जिन्हें तू बुलंदियां समझता है वो बुलंदियां नहीं हैं...सुनाकर खूब तालियां बटोरी। गोष्ठी में डॉ. गोपाल जोशी, केशवानंद जोशी, मनीष पांडे और प्रशांत पांडे ने भी मन मोहक रचनाएं पेश की।