बागेश्वर में रामलीला की तालीम लेते कलाकार। संवाद
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। नुमाशइखेत मैदान में होने वाले रामलीला मंचन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। जिले में रामलीला का इतिहास 1880 के दशक से माना गया है। माना जाता है कि 1890 में पहली बार जिले में रामलीला मंचन हुआ था। हालांकि कई लोग शुरुआती वर्ष को लेकर स्पष्ट नहीं हैं।
रामलीला भवन में इन दिनों शाम से देर रात तक कलाकारों को तालीम दी जा रही है। कोरोना के चलते पिछले दो साल से रामलीला का संक्षिप्त आयोजन ही हो रहा था। इस साल रामलीला का पूर्व की तरह भव्य आयोजन किया जाएगा।
रामलीला कमेटी के संरक्षक उमेश साह बताते हैं कि रामलीला की शुरुआत कब हुई, इसका कोई लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। लोगों की मान्यता के अनुसार रामलीला 1890 के आसपास ही शुरू हुई थी। हालांकि रामलीला मंचन में कुछ समय का ब्रेक भी लगा। 1927 से 1948 के बीच अपरिहार्य कारणों से बागेश्वर में रामलीला का मंचन नहीं हो पाया था।
1949 में दोबारा नगरवासियों ने रामलीला की शुरुआत की और चौक बाजार में रामलीला मंचन किया गया। जिसके अगले साल से रामलीला मंचन नुमाइशखेत में किया जाने लगा, जो अब तक जारी है। 25 अक्तूबर को नवरात्र के पहले दिन से रामलीला मंचन का आयोजन किया जाएगा।