अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में सफर करना यात्रियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। अधिकतर बस की खिड़कियों के शीशों ने जवाब दे दिया है तो यात्री फटी सीट के बीच सफर करने के लिए मजबूर हैं।
अल्मोड़ा डिपो से देहरादून, लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़, गुरुग्राम, हरिद्वार आदि शहरों के लिए रोज 30 बस का संचालन होता है, जिनमें 1200 से अधिक यात्री सफर करते हैं। इनमें से 20 से अधिक बस यात्रियों को आराम कम दर्द अधिक दे रही हैं।
संवाद टीम ने जब बस की हालत को लेकर पड़ताल की तो इनकी खिड़कियों के शीशे की पैकिंग क्षतिग्रस्त मिलीं, इससे हवा और बारिश का पानी भीतर घुस रहा है। हवा के तेज झोंकों से खिड़कियां खुल रही हैं।
वहीं अधिकतर बस की सीट फटी हैं, जिन पर बैठकर यात्री किसी तरह सफर करने के लिए मजबूर हैं। हालांकि निगम सबकुछ ठीक होने के दावे कर रहा है। लेकिन बस की खिड़कियों के टूटे शीशे और कटी-फटी सीट निगम की हालत की कहानी बयां कर रही हैं।
अल्मोड़ा डिपो के सहायक महाप्रबंधक राजेंद्र कुमार का कहना है कि अधिकतर बस की हालत ठीक है। फटी सीट बदलने के लिए बस को समय-समय पर हल्द्वानी भेजा जाता है। खिड़कियों के शीशे भी बदले जाते हैं। यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के निगम गंभीरता से प्रयास कर रहा है।
18 बस हैं पुरानी, रास्ते पर देने लगी हैं जवाब
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा डिपो के लिए वर्ष 2015 में 18 नई बस खरीदी गईं थीं जो पुरानी हो चुकी हैं। पहाड़ी सड़कों पर दौड़ती ये बस अब यात्रियों और निगम का साथ छोड़ने लगी हैं। बीते छह महीने में अल्मोड़ा डिपो की तीन बस का स्टेयरिंग फेल हो गया जबकि एक बस का ब्रेक फेल हो गया था। चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को क्षतिग्रस्त होने से बचा लिया। ऐसे में परिवहन निगम पुरानी बस के सहारे यात्रियों का सफर आरामदायक और सुरक्षित बनाने के दावे कर रहा है।
आठ बस सेवाओं में से चार ही बागेश्वर डिपो के अधीन
बागेश्वर। एक साल पहले अस्तित्व में आए बागेश्वर का रोडवेज डिपो अब तक व्यवस्थित नहीं हुआ है। लंबी दूरी की आठ बस सेवाओं में से आधी ही बस डिपो के अधीन हुई हैं। डिपो के पास केवल 11 बसों का बेड़ा है। इनमें से 9 बस उम्र पूरी करने जा रही हैं। डिपो के पास एक भी नई बस नहीं है।
बागेश्वर जिले से बागेश्वर-बरेली, धरमघर-दिल्ली वाया रीमा, अठपैंसिया-दिल्ली, भराड़ी-दिल्ली, मुनस्यारी-दिल्ली, बागेश्वर-देहरादून वाया गरुड़, बागेश्वर-दिल्ली वाया कौसानी-रानीखेत, धरमघर-दिल्ली वाया कांडा बस सेवा का संचालन होता है। अब तक केवल बागेश्वर-बरेली, धरमघर-दिल्ली वाया रीमा, अठपैंसिया-दिल्ली, भराड़ी-दिल्ली बस सेवा ही बागेश्वर डिपो के अधीन हुई हैं।
मुनस्यारी-दिल्ली बस सेवा पिथौरागढ़ डिपो से संचालित हो रही है। बागेश्वर-देहरादून वाया गरुड़ बस सेवा पर्वतीय डिपो देहरादून के अधीन संचालित हो रही है। बागेश्वर-दिल्ली वाया कौसानी-रानीखेत बस सेवा और धरमघर-दिल्ली वाया कांडा बस सेवा काठगोदाम डिपो के अधीन हैं।
डिपो कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बस बेड़े में शामिल 11 में से 9 बस छह से सात लाख किमी चल चुकी हैं। दो बस चार लाख से अधिक किमी चल चुकीं हैं। बस की अधिकतम उम्र आठ लाख किमी होती है। इसके बाद बसों की नीलामी करने का नियम है। पटरी पर आने के लिए छटपटा रहे बागेश्वर डिपो की व्यवस्थाएं कब ढर्रे पर आती हैं, यह अहम और सुलगता सवाल है।
बागेश्वर डिपो के प्रभारी सहायक महाप्रबंधक राजेंद्र कुमार का कहना है कि जल्द ही बागेश्वर जिले से संचालित शेष चार बस सेवा भी बागेश्वर डिपो के अधीन हो जाएंगी। इन बस सेवाओं की बसों में कई बस नई हैं। नए रूटों पर बसों का संचालन डिपो के व्यवस्थित होने के बाद ही होगा। मुख्यालय स्तर से नई बसों की खरीद होने पर डिपो को भी नई बसें आवंटित होंगी।
आधे रास्ते में हांफ जाती हैं बस
बागेश्वर। पुरानी बसों के सहारे चल रहे डिपो की बसें कब, कहां दगा दे जाएं, यह निश्चित नहीं है। लंबी दूरी की यह बस सेवाएं पुरानी बसों का खामियाजा भुगत रही हैं। कई बार बस जहां-तहां खड़ी हो जाती हैं। बीते अगस्त में ही दो बसों में रास्ते में खराबी आई थी, यात्री परेशान रहे थे।