ताड़ीखेत ब्लॉक में पारंपरिक धारों से पानी भरने को मजबूर हैं ग्रामीण। संवाद
- फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत क्षेत्र में पेयजल संकट को देखते हुए 2012 में स्वीकृत चिलियानौला तिपौला ग्राम समूह योजना भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्यास नहीं बुझा पा रही है। आए दिन ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है। योजना से ताड़ीखेत ब्लॉक की 28 ग्राम सभाओं के अलावा चिलियानौला नगर पालिका क्षेत्र भी जुड़ा है। 16 घंटे की पंपिंग के बजाय सिर्फ पांच घंटे की पंपिंग हो रही है, जिस कारण लोगों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है।
तिपौला ग्राम समूह योजना से गैरड़, थकुलाड़ी, सिमोली, पथुली, ऊंणी सहित कई गांव जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि इन गांवों में लंबे समय से पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। 22 करोड़ रुपये की योजना से यह योजना बनाई गई थी।
दरअसल पहले ताड़ीखेत गगास पेयजल योजना से 40 ग्राम सभाओं के अलावा सेना में भी पानी दिया जाता था। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन पानी की किल्लत बनी रहती थी। 2012 में चिलियानौला-तिपौला पेयजल योजना को मंजूरी मिली। 2019 में यह योजना बनकर तैयार हुई लेकिन वर्तमान में इस योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
सिमोली के सामाजिक कार्यकर्ता दीपक ठाकुर ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर योजना में गड़बड़ी की आशंका का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार धनराशि दे रही है लेकिन अधिकारी सही काम नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है तो किसी की तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
कोट
- पंपिंग का मामला यांत्रिक शाखा अल्मोड़ा की तरफ से पंप आपरेट किया जाता है। तिपौला पंपिंग योजना एक नवंबर से जलसंस्थान को हैंडओवर हो चुकी है। पंपिंग कम क्यों हो रही है। इसे दिखवाया जा रहा है।-समीर प्रताप सिंह, ईई, जल निगम रानीखेत।