VPKAS ने विकसित कीं मक्के की तीन प्रजातियां
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अल्मोड़ा में विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने मक्के की तीन नई प्रजातियां विकसित की हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि इन प्रजातियों के उत्पादन से किसानों की उपज में वृद्धि होगी।
संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत ने बताया कि कृषि फसल मानक अधिसूचना विमोचन की केंद्रीय उप समिति की बैठक में उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अगेती परिपक्वता एवं अधिक उपज वाली उच्च गुणवत्तायुक्त इन तीन प्रजातियों के विमोचन के लिए अनुशंसा की गई है।
ये हैं तीन प्रजातियां
- वीएल शिखर ...इस प्रजाति का विकास वीबीएल 107 और 108 के संयोजन से किया गया है। यह शरीर में खनिज तत्वों के अवशोषण काे बढ़ाती है। यह अगेती प्रजाति है, जिसमें फाइटेड की मात्रा 2.20 माइक्रोग्राम होती है।
- वीएल त्रिपोषी...इसका विकास वीबीएल 301 और 302 के संयोजन से किया गया है। क्वालिटी प्रोटीन, कम फाइटेड और अधिक प्रोविटामिन के कारण इसे वीएल त्रिपोषी नाम दिया गया है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए यह पहली ट्रिपल बायोफोर्टिफाइड संकर प्रजाति है।
- वीएल पोषिका ... इसका विकास वीक्यूएल 398 और 400 के संयोजन से किया गया है। यह भी अगेती प्रजाति है। इसमें ट्रिप्टोफैन 0.071 प्रतिशत और लाइसिन 0.304 प्रतिशत होता है। यह पूरे देश में और विशेष रूप से उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में क्यूपीएम की विविधता में वृद्धि करने में सहायक होगी।