अल्मोड़ा/बागेश्वर। वन पंचायत संगठन समेत विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने वन पंचायतों को वन विभाग के हस्तक्षेप से मुक्त करने की मांग की है। इसके लिए विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने डीएम कार्यालयों के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजे।
वन पंचायत संगठन के संरक्षक ईश्वरी जोशी के नेतृत्व में एकत्र कई लोग बुधवार को डीएम वंदना सिंह से मिले और उनके माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने वन पंचायतों के सशक्तीकरण के लिए कई सुझाव दिए। बताया कि शासन, प्रशासन की अनदेखी से वन पंचायतें संकट के दौर से गुजर रहीं हैं। वन पंचायत की पहली नियमावली पुराने कानून के तहत बनाई गई थी लेकिन वर्तमान नियमावली वन अधिनियम 1927 की धारा 28 के तहत बनाने के बाद अब वैधानिक रूप से वन पंचायत नहीं रही। पंचायती वनों की स्थिति ग्राम वन की हो गई है जबकि ऐसा नहीं है।
उन्होंने सरपंचों को मानदेय देने, वन पंचायत सदस्यों का बीमा कराने, प्रदेश में वन पंचायत के चुनाव गुप्त मतदान से एक साथ कराने, लीसा राॅयल्टी का भुगतान जल्द करने, वन पंचायतों से अतिक्रमण हटाने की मांग की। ज्ञापन देने वालों में उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के तरुण जोशी, प्रधान भुवन आर्या, सरपंच संगठन ताकुला के अध्यक्ष डूंगर सिंह, सरपंच महेंद्र बिष्ट, पूरन नयाल, हर सिंह बिष्ट, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे। इन्हीं मांगों के लिए वन पंचायत सरपंच संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पूरन सिंह रावल, जगदीश जोशी, मदन उपाध्याय आदि ने बागेश्वर कलक्ट्रेट के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजा।