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Almora News: तीन अस्पतालों की दौड़ लगाई, फिर भी जान नहीं बच पाई

Sat, 23 Sep 2023 11:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा का बेस अस्पताल।
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अल्मोड़ा। पहाड़ में लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कीमत पांच महीने के मासूम को जान देकर चुकानी पड़ी। परिजन उसे लेकर तीन अस्पतालों में दौड़ते रहे। इसके बावजूद उसकी जान नहीं बच पाई। परिजनों ने बेस अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाकर रात में जमकर हंगामा किया।
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धौलादेवी ब्लॉक के ग्राम पंचायत नाकोट के तोक डोगरा निवासी चंद्रशेखर तबियत बिगड़ने पर अपने पांच महीने के मासूम बेटे को 21 सितंबर को जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर ने उन्हें जांच के बाद बच्चे को घर ले जाने की सलाह दी लेकिन चंद्रशेखर बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंच गए। वहां मासूम की हालत खराब बताते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया। अंत में परिजन उसे लेकर मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल पहुंचे, जहां उसे पीडीआईसीयू में भर्ती किया। रात में मासूम का स्वास्थ्य बिगड़ गया और उसने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत पर परिजन भड़क गए और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया।





मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैंसोडा का कहना है कि परिजन बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल लाए थे। उसे निमोनिया की शिकायत थी। उसे भर्ती कर उपचार किया जा रहा था, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस मामले में लापरवाही का सवाल ही नहीं है।
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कांडा सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, भगवान भरोसे मरीज



कांडा/बागेश्वर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं हैं और महिला रोग विशेषज्ञ का पद भी लंबे समय से रिक्त है। 40,000 से अधिक की आबादी वाले क्षेत्र के एकमात्र सीएचसी में विशेषज्ञों की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। इसके चलते कांडा सीएचसी रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।



कांडा में 10 बेड का सीएचसी है। रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं होने से मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए 30 से 70 किमी की दूरी तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। तीन साल से महिला रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। जब अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ थीं तब पिथौरागढ़ जिले के बेड़ीनाग क्षेत्र से भी गर्भवतियां प्रसव कराने के लिए यहां आती थीं। वर्तमान में तहसील क्षेत्र की महिलाओं को जांच और प्रसव के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता है।





ये पद हैं रिक्त



1. फिजीशियन



2. सर्जन



3. महिला रोग विशेषज्ञ



4. बाल रोग विशेषज्ञ



5. निश्चेतक



लोगों की पीड़ा
व्यापारी दीप वर्मा का कहना है कि अस्पताल होते हुए भी लोगों को बाहर जाना पड़ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के सृजित पदों पर जल्द चिकित्सक तैनात किए जाने चाहिए। महिला रोग विशेषज्ञ का पद प्राथमिकता से भरा जाना चाहिए। जोगाबाड़ी के अर्जुन सिंह माजिला का कहना है कि सीएचसी केवल मरीजों को रेफर करने का केंद्र बना है। दूरदराज से लोग इलाज कराने आते हैं। बेहतर सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को बाहर की दौड़ लगानी पड़ती है।







बागेश्वर के सीएमओ डॉ. डीपी जोशी का कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों की सूची शासन को भेजी है। अस्पताल में तैनात चिकित्सक बेहतर सेवा देने का प्रयास कर रहे हैं। नए चिकित्सकों की तैनाती होने पर जिले में भी विशेषज्ञ चिकित्सक की समस्या दूर हो जाएगी।




बागेश्वर: जिला अस्पताल में डेंगू के चार मरीज भर्ती



बागेश्वर। जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में चार मरीज भर्ती हैं। शुक्रवार की रात जिला अस्पताल में डेंगू के आठ मरीज भर्ती थे। शनिवार को चार मरीजों को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। सीएमएस डॉ. एसपी त्रिपाठी ने बताया कि सभी मरीज जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती हैं। ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीज डिस्चार्ज कर दिए गए हैं। संवाद
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