द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। 20 साल 20 सवाल वेबिनार कार्यक्रम में उक्रांद नेताओं ने शराब और रोजगार के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। कहा कि राजस्व के नाम पर राज्य में घर घर शराब पहुंचा दी गई। राष्ट्रीय दलों में इच्छाशक्ति होती तो राजस्व प्राप्ति के अन्य संसाधन विकसित करते।
दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार, आन्दोलनकारी चारु तिवारी के सवाल के जवाब में उक्रांद नेताओं बृंह्मानन्द डालाकोटी, चन्द्र शेखर कापड़ी, युवा नेता सुनील ध्यानी व विजय बौड़ाई ने विचार रखे। घर घर शराब पहुंचाने को लेकर सरकारों की नीतियों को जमकर कोसा। कहा कि शराब बंदी को लेकर आज तक हुए सभी आंदोलनों को सरकार ने हाशिये पर खड़ा कर दिया है। कहा सरकार राजस्व को लेकर इतनी उतावली है कि जहां दुकान नहीं मिल रही वहां मोबाइल वैन से शराब बिकवा रही है। रोजगार के मुद्दे पर उक्रांद नेताओं ने कहा कि, पार्टी का शुरुआत से सोचना है कि सरकारी,अर्द्ध सरकारी, सरकार की मदद से चल रहे उपक्रमों, निगमों, संस्थाओं आदि में उत्तराखंड के हर परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यतानुसार रोजगार मिले। राजस्व प्राप्ति के लिए उत्तराखंड में स्थानीय उत्पादों आधारित लघु कुटीर उद्योगों का जाल बिछाकर सहकारिता के माध्यम से हर परिवार की महिलाओं को इससे जोड़ा जा सकता है। उत्तराखंड में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। युवाओं को उम्मीद थी कि रोजगार मिलेगा, लेकिन पटवारी भर्ती, दरोगा भर्ती आदि घोटाले, फर्जी मूल के चलते बाहरी लोगों के रोजगार प्राप्त करने के चलते यहां का युवा अवसाद में है। उत्तराखंड में बेरोजगारी की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। सात लाख से ज्यादा युवाओं के सेवायोजन कार्यालयों में आवेदन पंजीकृत हैं, परन्तु सरकार के पास नीतियों का अभाव है।