अल्मोड़ा के उदयशंकर अकादमी में नृत्य करती तनुश्री शंकर।
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नृत्य सम्राट उदय शंकर की नगरी अल्मोड़ा में रविवार को उनकी पुत्रवधू और प्रसिद्ध कलाकार 70 वर्षीय तनुश्री शंकर ने पहली बार अपनी टीम के साथ प्रस्तुति दी। उदय शंकर नाट्य अकादमी में आयोजित सात दिवसीय रंगमंच एवं फिल्म निर्माण कार्यशाला के समापन समारोह पर कोलकाता से पहुंची तनुश्री शंकर की मंडली ने अपनी कला से दर्शकों का मन मोह लिया। करीब 51 साल बाद अल्मोड़ा पहुंचीं तनुश्री ने यहां के बदले स्वरूप को देखकर अपने अनुभव भी साझा किए।
तनुश्री शंकर इससे पहले वर्ष 1975 में अपने पति स्व. आनंद शंकर के साथ पहली बार अल्मोड़ा आई थीं। इसके बाद अब वह दोबारा यहां पहुंचीं। अल्मोड़ा पहुंचने पर शहर को देखकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने कहा कि यहां बहुत कुछ बदल गया है। हालांकि पुरानी यादें अब भी उनके साथ हैं। नृत्य सम्राट उदय शंकर का अल्मोड़ा से विशेष लगाव रहा है। कला और नृत्य के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण अल्मोड़ा को उदय शंकर की नगरी के रूप में पहचान मिली। ऐसे में उनकी पुत्रवधू और टीम की पहली प्रस्तुति कला प्रेमियों के लिए खास रही।
कहानी राजा सुथी लाल की... रही आकर्षण
पं. गोविंद बल्लभ पंत राजकीय संग्रहालय और संस्कृति विभाग, उत्तराखंड की ओर से आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला में 40 प्रतिभागियों ने रंगमंच, अभिनय, पटकथा, कैमरा, फिल्म और डॉक्यूमेंट्री निर्माण समेत विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण लिया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के आधार पर अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं।
‘कहानी राजा सुथी लाल की’ पर आधारित नाट्य प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसका मार्गदर्शन कैलाश कांडवाल, शुभम शर्मा और अभिषेक डोभाल ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक मनोज तिवारी ने किया। भातखंडे संगीत महाविद्यालय अल्मोड़ा के कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां दीं।
इस अवसर पर तनुश्री शंकर को अल्मोड़ा में निर्मित तांबे के गोलू देवता की प्रतिमा स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई। कार्यक्रम में मेयर अजय वर्मा, दायित्वधारी गंगा बिष्ट और गोविंद सिंह पिलख्वाल, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी, प्रो. शेखर जोशी, वसुधा पंत, डॉ. दीपा गुप्ता, कार्यक्रम क्यूरेटर हिमांशु धरमोरा, संग्रहालय निदेशक जयंती खाती आदि मौजूद रहीं।